धर्मधारा


केरलमें साम्यवादियोंने ‘राम और रामायण’का आश्रय लेकर यह तो सिद्ध कर दिया कि रामके बिना वे किसी कामके नहीं रहनेवाले हैं ! जिस रामको वे काल्पनिक पत्र कहते थे, अब वे उसीकी शरणमें आए है ! आजके राजनेता यह सिद्ध कर रहे हैं कि सत्ता प्राप्त करने हेतु नास्तिकसे आस्तिक, हिन्दूसे मुसलमान या ईसाई कुछ भी बन सकते हैं, उनके लिए लक्ष्यको प्राप्त करना अधिक महत्त्व रखता है, उसे प्राप्त करनेका साधन या कर्म, या उनके लिए गौण होता है ।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution