साधना किसे कहते हैं ?


ईश्वरप्राप्ति या आनंदप्राप्ति या आध्यात्मिक प्रगति हेतु प्रतिदिन जो भी हम तन, मन, धन, बुद्धि या कौशल्यसे प्रयास करते हैं, उसे साधना कहते हैं । साधनाके अनेक मार्ग हैं, जैसे कर्मयोग, ज्ञानयोग, ध्यानयोग, भक्तियोग, राजयोग, शक्तिपातयोग, कुंडलिनियोग, भावयोग, क्रियायोग, गुरुकृपायोग इत्यादि । यह हिन्दु धर्मकी विशेषता है; और धर्मके मूलभूत सिद्धान्त भी, जो स्पष्ट रूपसे कहते हैं कि प्रत्येक  व्यक्तिका साधना मार्ग भिन्न होता है । स्वामी विवेकानन्दने कहा है, ‘जतो मत, ततो पथ”, अर्थात जितने व्यक्ति, उतनी ही प्रकृतियां और उतनी ही साधनाकी पद्धतियां । प्रत्येक व्यक्ति अपने आपमें एक भिन्न अस्तित्व होता है । अतः उसके कर्म करनेकी गति, उसके विचार करनेकी प्रक्रिया, उसके पूर्व संचित, प्रारब्ध, आनुपातिक पंचतत्त्व और पंचमहाभूत, सब भिन्न होते हैं; इसलिए साधनाके मार्ग भी भिन्न होते हैं -तनुजा ठाकुर



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