१. जन्मदिन दिनांक अनुसार मनाते हैं, तिथि अनुसार नहीं ! तिथि अनुसार जन्मदिन मनाने से उस दिन हमारे सभी सूक्ष्म देहके द्वार आशीर्वाद हेतु खुल जाते हैं ।
२. अर्धरात्रिको शुभकामनाएं देते हैं, जो वास्तविक रूपमें अशुभ घडी होती है, किसी भी शुभकार्यको अर्धरात्रिमें करना टालना चाहिए । वैदिक संस्कृति अनुसार दिवसका आरम्भ सूर्योदयसे होता है; अतः शुभकामनाएं सूर्योदयके पश्चात देनी चाहिए ।
३.मोमबत्ती जलाते हैं ! मोमबत्ती तमोगुणी और दीप सत्त्वगुणी होता है; अतः जन्मदिन जैसे शुभ दिवपर मोमबत्ती जलाकर तमोगुणका प्रभाव अपने अन्दर बढाते हैं, जबकि उस दिन जिसका जन्मदिन है, उसकी आरती उतारनी चाहिए ।
३. तदुपरान्त मोमबतीको बुझाते हैं ! ज्योतिको मुखसे फूंकना और उसे बुझाना दोनों ही अशुभ कृतियां हैं । इससे हमारे जीवनमें तमप्रधान कष्ट बढते हैं और ज्योत, जो तेज तत्त्वका प्रतीक होती है, जो हमें तेजस्वी बनाती है, उसके स्थानपर हम तमोगुणी बननेका प्रयास करते हैं ।
४. किसी वस्तुको काटना एक विध्वंसक कृति है; परन्तु हम ‘केक’ काटते हैं और अन्नपूर्णा मांकी ‘अवकृपा’ उस शुभ दिवसमें प्राप्त करते हैं, जबकि उस दिन दरिद्र, अनाथ या सन्त जनको अन्नदान करना चाहिए, जिससे हमपर अन्नपूर्णा मांकी कृपा बनी रहे और घरपर खीर, हलवा जैसा भोग कुलदेवीको चढाकर ग्रहण करना चाहिए और बांटना चाहिए ।
५ . हम एक दूसरेको प्रेमका दिखावा करते हुए, जूठा ‘केक’ खिलाते हैं, वस्तुतः जूठन कभी नहीं ग्रहण करनी चाहिए, इससे जिस व्यक्तिको अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट होता है, वह सहज ही संक्रमित हो जाती है (आज समाज में ७०% साधारण व्यक्तिको और ९०% अच्छे साधकोंको अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट है) ।
६. उस दिन हम सहर्ष उपहार स्वीकार करते हैं या उसकी सबसे अपेक्षा रखते हैं, इससे आध्यात्मिक दृष्टिसे हमारा लेन-देन बढता है और हम जन्म-मृत्युके चक्रमें और बन्ध जाते हैं । इससे बच्चोंके मनमें देनेकी प्रवृत्तिके स्थानपर लेनेकी प्रवृत्ति बढती है, जो भविष्यमें उसे एक अच्छा व्यक्ति बननेमें अवरोध निर्माण करती है ।
७ . तत्पश्चात हम भोजनालयमें (होटलमें) जाकर तमोगुणी भोजन ग्रहण करते हैं !
८. कुछ तो ‘पब’ में जाते हैं और मद्यपान कर अनिष्ट शक्तियोंको आमन्त्रण देते हैं और भूतों समान अन्धेरेमें सब अधनंगी युवतियोंके साथ मद्यके मदमें (नशेमें) धुत्त होकर पाश्चात्य धुनोंपर बने तामसिक गीतोंपर नाचते हैं और इस प्रकार जन्मदिन जैसे शुभ दिवसपर अपने विनाश और अपने शुभचिन्तकके विनाशका सर्व उपाय कर ‘वचनं किम दरिद्रता’ अर्थात वचनसे क्यों दरिद्र बने ?; इसलिए ‘HAPPY BIRTHDAY TO U’ कहते हैं !
हिन्दुओ ! यह मानसिक स्तरकी पाश्चात्योंवाली आत्मघाती पद्धतिसे जन्मदिन मनानेके स्थानपर पारम्परिक रीतिसे जन्मदिन मनाएं और देवी-देवता एवं अपने घरके वयोवृद्धोंका आशीर्वाद लें ! – तनुजा ठाकुर
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