अ. बिना कुल्ला किए अपने बिछावनपर चाय (बेड टी) न लें । सम्पूर्ण रात्रि जो भी थूकके रूपमें तमोगुण मुखमें एकत्रित होता है, वह चायके माध्यमसे पेटमें चला जाता है और इससे शारीरिक व्याधि होनेकी आशंका तो बढती ही हैं साथ ही हमारी वृत्ति तमोगुणी बनती है । साथ ही प्रातःकालके आहारका शुभारम्भ चायसे करना, विष पीकर दिवसका आरम्भ करने समान है । ध्यान रहे, चाय, अंग्रेजोंद्वारा अपने आर्थिक लाभ हेतु आरम्भ किया गया एक तमोगुणी पेय है; अंग्रेजोंके आनेसे पूर्व चायका प्रचलन भारतमें नहीं था; अतः यथासम्भव इसका परित्याग करें । प्रातःकाल, रात्रिमें आठ घंटे पूर्व, ताम्बेके पात्रमें रखे एकसे सवा लीटर जलका सेवन घूंट-घूंट कर, पीकर करें एवं तत्पश्चात ४५ मिनिट कुछ भी ग्रहण न करें । कफ-प्रधान व्यक्ति प्रातःकाल हल्का गरम जल पी सकते हैं, इससे मल-मूत्रके सहज निष्कासनके साथ ही शरीरके अन्य विषाक्त तत्त्व निकल जाते हैं एवं शरीर निरोगी रहता है ।
आ. प्रातःकाल उठनेके साथ चित्रपटके गीत न सुनें, आजकल लोग सैर करने हेतु जाते समय या व्यायामशाला जाते समय अपने चार पहिए वाहनमें एफएम रेडियो चला देते हैं, ऐसे मैंने देखा है । ऐसे गीत व्यावसायिक लाभ हेतु बनाए जाते हैं; अतः वे राजसिक या तामसिक होते हैं । प्रातःकालका शुभारम्भ संस्कृतके स्तोत्रपठन, भजन या नामजप सुनकर करें, वह भी यदि किसी सन्तकी वाणीमें हो और भी उत्तम होगा । अपने नित्य कर्म करते समय नामजप करें, इससे शारीरिक कार्य करते समय नामजपका संस्कार अन्तर्मनमें अंकित होगा और सम्पूर्ण दिवस देवकृपा बनी रहेगी – तनुजा ठाकुर (क्रमश:)
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