सात्त्विक जीवन प्रणाली कैसे करें व्यतीत ? (भाग – ६)


अ. स्नान करते समय रासायनिक साबुनका (वर्तमान कालके केमिकल साबुन) उपयोग करना टालना चाहिए । रासायनिक साबुन मूलत: तमोगुणी होते हैं अतएव उससे स्नान करनेसे, सात्त्विकतामें वृद्धि नहीं होती है, इसके विपरीत तमोगुणका आवरण सम्पूर्ण देहपर निर्माण होता है, इससे तो अच्छा है कि मात्र सामान्य जलसे स्नान कर लिया जाए। स्नान करते समय आयुर्वेदिक साबुन, जो किसी सन्तके आश्रममें निर्मित हो, उसे उपयोगमें लाना सर्वोत्तम होता है या घरमें ही चनेकी दालका बेसन, मिट्टी (मुल्तानी या गंगाकी या किसी तालाबकी चिकनी मिट्टी) या उबटनका उपयोग कर स्नान कर सकते हैं क्योंकि ऐसे स्नानसे सात्त्विकतामें वृद्धि होती है।
आ. स्नान करते समय नग्न होकर स्नान कभी नहीं करना चाहिए, इससे सूक्ष्म जगतकी अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट तो होता ही है साथ ही देव-पितर इत्यादि जो हमारे आस-पास होते हैं, उनकी अवकृपा भी मिलती है। भगवान् श्रीकृष्णने भी गोपियोंको निर्वस्त्र होकर यमुनामें स्नान करने हेतु मना किया था। हमारी भारतीय संस्कृतिमें सामान्यत: स्त्रियां भी, घरके कुंएपर जहां थोडी आड होती थी, वहां वस्त्र पहनकर स्नान किया करती थीं। आजकल बन्द कक्षमें सभी निर्वस्त्र होकर स्नान करनेकी तमोगुणी कृति करते हैं  – तनुजा ठाकुर  (क्रमश:)



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