
जब भी किसी संतके आश्रममें जाएं और आपको कोई सेवाकी संधि मिली तो इस प्रकार प्रार्थना करें ” हे परम पूज्य गुरुदेव, मुझे आपकी कृपासे यह सेवाकी संधि मिली है, मेरी यह सेवा चूक विरहित, भावपूर्ण, एकाग्रतापूर्वक और परिणामकारक (output oriented) हो ऐसा आप कृपा करें, सेवाके मध्य चूक होते समय ही हमें चूकका भान हो जाये और उसे हम समय रहते ठीक कर लें और सेवा परिपूर्ण हो और आपके श्रीचरणों तक पहुंचे ऐसी कृपा करें ! ” -तनुजा ठाकुर
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