आजके विद्यालय केवल बाह्य शिक्षा देते हैं


आजके अधिकांश विद्यालय बाह्य रूपसे विद्या अर्जनकी नित्य नई योजनाएं प्रस्तुत करते रहते हैं और उसे क्रियान्वित करते रहते हैं; परन्तु पूर्ण व्यक्तित्त्व विकास हेतु मनकी एकाग्रता, नैतिकता और ब्रह्मचर्यका पालन, यह कैसे आत्मसात करें ? यह कोई विद्यालय नहीं सीखाता; परिणामस्वरूप ऐसे प्रतिष्ठित विद्यालयके विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रोंके शीर्षपर तो पहुंच जाते हैं; किन्तु इन विद्यार्थीके जीवनमें यदि कोई विपरीत प्रसंग आ जाए जैसे आर्थिक मन्दी या भावनात्मक आघात पहुंचे तो उन्हें आत्महत्या करते या अवसादके रोगी बनते देर नहीं लगती, इससे आजकी शिक्षण पद्धतिके खोखलेपनका भान होता है ।  – तनुजा ठाकुर



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