धर्मधारा


आजकल लोग (स्त्री और पुरुष) दोनों ही सुन्दर दिखनेके क्रममें भिन्न प्रकारके कृत्रिम रसायनोंसे बने मुखलेप (फेस क्रीम) लगाते हैं, इससे बाहरसे उनकी त्वचा सुन्दर और आकर्षक दिखती है; किन्तु सूक्ष्म स्तरपर शरीरपर काला आवरण निर्माण हो जाता है, जिससे भविष्यमें अनिष्ट शक्तियोंके कष्ट होनेकी आशंका बढ जाती है ।  आजके शोभाचार (फैशन) उद्योगके सौ प्रतिशत ‘मॉडल’ अनिष्ट शक्तियोंके कष्टसे पीडित होते हैं । इसलिए सुन्दर दिखने हेतु भीतरकी तेजस्विताको जागृत करें, इस हेतु नामजप, ध्यान, योगासन, प्राणायाम नियमित करें ! और यदि मुखको सुन्दर बनाने हेतु लेप ही लगाना हो तो नैसर्गिक वस्तुओंका लेप करें । हमारी संस्कृति बहुत समृद्ध है, इसमें मुखपर लगाने हेतु भी अनेक प्रकारके लेप, उबटन इत्यादि बताए गए हैं । जहांतक हो कृत्रिम रसायनोंके उपयोगका परित्याग करें ! आपका मुख तो चमकेगा ही, आपके प्रभामण्डलकी ओजस्विता आपके कपाल और मुखपर भी स्पष्ट दिखाई देगी । समाजको सात्त्विक और तामसिक श्रृंगारके मध्य भेद नहीं पता है, यह उसीका परिणाम है ।



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