धर्मधारा


‘अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन’के अवसरपर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीका सन्देश
१. कश्मीरमें सेवारत सभी सैनिकों भाइयोंके धैर्यको देखकर आश्चर्य होता है, उनकी देशभक्तिको नमन करनेको मन करता है, कोई और देशके सैनिक होते तो वे इस निर्दय व्यवस्थाके विरुद्ध विद्रोह कर देते ! निश्चित ही यह, उनके रक्तमें बह रहे कई युगोंसे अपने राजाके आज्ञापालनके प्रति निष्ठा दर्शाता है अन्यथा हमारे पडोसी राष्ट्रोंमें ही सेनाका विद्रोही स्वभाव किसीसे छिपा नहीं है ! इस देशके सभी नागरिकोंने ऐसे वीर और धैर्यवान भाइयोंके जीवनकी रक्षाके लिए मां भगवतीसे प्रार्थना करनी चाहिए और राष्ट्रप्रेमियोंने ऐसे राज्यकर्ताओंको नियुक्त करना चाहिए जो ऐसे सैनिकोंकी वेदनाको समझ सके और यह मात्र हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे ही सम्भव है, यह सभीको अब समझमें आने लगा है ! अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थपानाके लिए कृतिशील हों एवं हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु गोवामें आरम्भ हो चुके सप्तम अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनको अपनी ओरसे समर्थन दें ! अब मात्र हिन्दू राष्ट्र ही इस देशके सर्व समस्याओंका समाधान है ।



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