धार्मिक अराजकता समाप्त होनेके लिए हिन्दू राष्ट्र आवश्यक !


वर्तमान कालमें जैसे सामान्य व्यक्तियोंको और साधकोंको सूक्ष्म जगतकी अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट है । वैसे ही आजके अनेक कथावाचकोंको व प्रवचनकरोंको भी अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट है । इसके पीछे एक तो उनके जीवनमें योग्य गुरुका न होना है और दूसरा उनमें अनेक दोषों एवं तीव्र अहंका होना है । आप तो देख ही रहे है ऐसे कथावाचकोंने किस प्रकार धर्मका व्यापार करना आरम्भ कर दिया है ? वे अपनी लोकैषणामें इतने लिप्त हो चुके हैं कि व्यासपीठके पीछे तो अनेक अनैतिक कार्य करते ही हैं, साथ ही अब तो वे व्यासपीठको भी कलंकित करनेमें नहीं चूकते हैं । इसलिए हिन्दू राष्ट्रमें सभी धर्माचार्योंका आध्यात्मिक स्तर, प्रत्येक वर्ष सार्वजनिक किया जाएगा ।  इससे इन्हें स्वयं ही ज्ञात हो जाएगा कि वे अध्यात्ममें कहां है और उन्हें सन्त पदको प्राप्त करने हेतु और कितने प्रयास करने हैं ? धर्मप्रसार हेतु एक राष्ट्रीय समितिका गठन होगा एवं स्वतन्त्र रूपसे धर्मप्रसार करने हेतु इन्हें इस समितिसे अनुमति लेनी होगी । इस समितिमें ऐसे सन्त होंगे जिन्हें आध्यात्मिक स्तरवाला तत्त्वज्ञान ज्ञात होगा एवं वे मिलकर धर्मप्रसारकोंका आध्यात्मिक स्तर बताएंगे ! इस देशमें हिन्दू राष्ट्र आते ही ऐसी धार्मिक अराजकता समाप्त हो जाएगी । इसलिए हिन्दू राष्ट्र चाहिए !


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