एक पाठकने पूछा है कि धर्मकार्य किसे कहते हैं ?


जिस कार्यसे जीवका ऐहिक और पारलौकिक कल्याण हो एवं जिससे समाज व्यवस्था उत्तम रहे, उसे धर्म कहते हैं, यह परिभाषा आद्य गुरु शंकराचार्यने दी है ! वस्तुत: इस परिभाषा अनुरूप कार्यको ही धर्मकार्य कहना चाहिए ! वैसे यदि आप किसी सन्तके कार्यसे जुडकर सेवा करते हैं तो वह भी धर्मकार्यकी ही श्रेणीमें आता है; क्योंकि सन्तोंसे अच्छा धर्मको और कौन समझ सकता है ?!



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