शरिया न्यायालयका आश्रय लेकर कश्मीरके डिप्टी मुफ्तीने विभाजनकी बात की !


जुलाई १०, २०१८

‘ऑल इण्डिया मुस्लिम लॉ बोर्ड’की (AIMPLB) ओरसे देशमें प्रत्येक प्रान्तमें ‘शरिया न्यायालय’ (दारुल कजा) खोलनेकी योजनापर राजनीति आरम्भ हो गई है । ‘एआईएमपीएलबी’के इस पगका बीजेपी जहां विरोध कर रही है, वहीं जम्मू-कश्मीरके डिप्टी ग्रैण्ड मुफ्ती, नासिर-उल-इस्लामने शरिया न्यायालयका आश्रय लेकर विभाजनका राग छेड दिया है ।

मुफ्तीने कहा कि भाजपाको देशमें शरिया न्यायालयोंसे समस्या है तो हमको एकाकी छोड देना चाहिए ! डिप्टी ग्रैण्ड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम जम्मू-कश्मीर शरिया न्यायालयके उपाध्यक्ष हैं । उन्होंने देशके सभी प्रान्तोंमें एआईएमपीएलबी’द्वारा शरिया न्यायालयके विस्तार किए जानेका समर्थन किया है ।

मुफ्तीने कहा कि यदि भाजपाको हमारी धार्मिक प्रथाओंसे समस्या है, तो उन्हें हमें एकाकी छोड देना चाहिए । उन्होंने कहा कि भारतमें लगभग २० कोटि मुस्लिम जनसंख्या है, जिन्हें धार्मिक प्रथाओं और विश्वासको माननेसे रोका नहीं जा सकता है !

मुफ्ती नासिरने कहा कि हमें धार्मिक स्वतन्त्रतासे रोका गया तो फिर भारतके मुसलमानोंको १९४७ जैसे देशके विभाजनके लिए सोचना पडेगा ! उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपने लिए भिन्न राष्ट्र बनानेके विषयमें सोचें !

देशमें प्रत्येक प्रान्तमें शरिया न्यायालयके विस्तारपर बीजेपी प्रवक्‍ता मीनाक्षी लेखीने कहा था ‘आप धार्मिक प्रकरणपर चर्चाकर सकते हैं; लेकिन इस देशमें न्‍यायपालिकाका महत्‍व है । देशके गांवों और प्रान्तोंमें ‘शरिया न्यायालय’का कोई स्‍थान नहीं है ! देशके न्यायालय नियम अन्तर्गत कार्य करती हैं । हमारा देश ‘इस्‍लामिक रिपब्लिक ऑफ इण्डिया’ नहीं है !’

बता दें कि ‘एआईएमपीएलबी’ने समूचे देशमें शरिया न्यायालयोंका विस्तार करनेकी योजना बनाई है । इस सम्बन्धमें १५ जुलाईको दिल्लीमें होने वाली बैठकमें शरिया न्यायालयोंके प्रस्तावपर विमर्श किया जाएगा ।

स्रोत : आजतक



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