साधारणसे उधारके विवादपर समुदाय विशेषके चालीस लोगोंने लगाए ‘घर बिकाऊ है’के फलक
०२ जनवरी, २०२१
मेरठ जनपदके मवीमीरा गांवमें ४० घरोंपर बिकाऊके फलक (बैनर) चिपके हुए दिखाई दिए । यह विवाद केवल बीस रुपयोंके उधारको लेकर हुआ है । समुदाय विशेषके एक युवकने अपने घरके परिसरमें ही दैनिक खाद्य सामग्रीकी छोटीसी आपणि (दुकान) बना रखी है ।
कुछ दिवस पूर्व सुन्दर नामक व्यक्तिद्वारा ‘सिगरेट’ उधार मांगनेपर, विक्रेताने मना कर दिया था । पासमें खडे अन्य युवक तैयबने सुन्दरको उधार दिलवा दिया । कुछ दिनों पश्चात उधार नहीं लौटनेपर सुन्दर और तैयबके मध्य विवाद उत्पन्न हो गया । कुछ बढे-बूडे लोगोंने उनका ‘समझौता’ करवा दिया; किन्तु सुन्दरने अपने कुछ साथियोंके साथ तैयबके घरपर आक्रमण कर दिया । उसने तोडफोडके साथ-साथ तैयबके परिजनके साथ भी दुर्व्यवहार किया ।
समुदाय विशेषके कुछ लोगोंने दुःखी होकर अपने निवासोंपर ‘घर बिकाऊ है’के फलक (पोस्टर) चिपका दिए । फलक उतारनेके लिए समझाए जानेपर, उन्होंने पुलिससे आरोपीके विरुद्ध कार्यवाही करनेकी मांग की । परिवादकर्ताओंका कहना है, यद्यपि अपराधीका नाम पुलिसको बताया जा चुका है, तथापि पुलिसने अभीतक कोई कार्यवाही नहीं की है ।
यद्यपि हम किसी प्रकारके कलह अथवा हिंसाका समर्थन नहीं करते; इस छोटेसे विवादपर फलक लगानेवाले मुसलमानोंको भगवानका धन्यवाद करना चाहिए कि हिन्दू काटता नहीं है; क्योंकि हिंसा उसका संस्कार नहीं है; अन्यथा ये मुसलमान उन प्रकरणोंपर दृष्टि डालें, जहां हिन्दुओंको पलायन करना पडा है; क्योंकि वहां हिन्दू महिलाओंका बलात्कार किया जाता है, युवतियोंसे जिहादकर उनका जीवन सुनियोजित ढंगसे नष्ट किया जाता है; किसीका भाई मारा जाता है, किसीका पुत्र; परन्तु यहां केवल बातको बिगाडने हेतु फलक लगाए गए हैं, जबकि ऐसे छोटे-छोटे झगडे तो देशमें आज प्रत्येक स्थानपर होते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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