‘भगवान गणेशकी प्रतिमाओंका हुसैन सागर झीलमें नहीं होगा विसर्जन’, तेलंगाना उच्च न्यायालयने राज्य शासनको दिया रोकनेका आदेश
१० सिंतबर, २०२१
तेलंगानामें ‘प्लास्टर ऑफ पेरिससे (POP)’ बनी गणेश प्रतिमाओंके हुसैन सागर झील तथा अन्य जलाशयोंमें विसर्जनकी अनुमति नहीं दी जाए । तेलंगाना उच्च न्यायालयने गुरुवारको (९ सितम्बर २०२१) राज्य शासनको यह आदेश दिया । इसके साथ ही, न्यायालयने कहा कि स्थानीय एवं नगरीय (शहरी) निकाय क्षेत्रोंमें सीमित संख्यामें पण्डालोंको अनुज्ञापत्र (लाइसेंस) एवं अनुमति दी जानी चाहिए ।
तेलंगाना उच्च न्यायालयके कार्यवाहक, मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव एवं न्यायाधीश टी. विनोद कुमारकी न्यायपीठने (बेंचने) कहा, “गैर पीओपी प्रतिमाओंका विसर्जन हुसैन सागर झीलके दूसरी ओर, जैसे पीवी घाट, सचिवालय मार्ग, संजीवैया पार्क रोड आदि स्थानोंपर किया जा सकता है ।” इसके साथ ही, उच्च न्यायालयने अवमानना याचिकाको बन्द कर दिया । न्यायालयने कहा कि छोटे तथा पर्यावरण हितैषी प्रतिमाओंके उपयोगको प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे पर्यावरणपर उनके विपरीत प्रभावसे रक्षा की जा सके एवं अधिक जनसमूह एकत्रित किए बिना, परम्पराको साधारण एवं सरल उपायसे किया जाना चाहिए । इसके साथ ही, पण्डालोंमें रात्रि १० बजे पश्चात, ध्वनिविस्तारक यन्त्रोंके (लाउड स्पीकर) उपयोग करनेकी अनुमति नहीं दी गई तथा न ही किसी पण्डालको मार्गोंपर लगाया जा सकेगा ।
सामान्य मिट्टी एवं बिना ‘सिंथेटिक पेंट’से बनी प्रतिमाओंके विसर्जनपर कोई रोक नहीं है । इनके लिए शासन, हुसैन सागरमें इन्फ्लेटेबल रबर’के कुण्ड बनाकर एक वैकल्पिक स्थान बना सकती है, जहां विसर्जन हो सकें । साथ ही छोटी गणेश प्रतिमाओंको प्रोत्साहन देनेके लिए भी कहा गया । इसके अतिरिक्त, जलके अतिप्रवाहको रोकनेके लिए गाद एकत्रित होनेसे बचानेके लिए सम्बन्धित लोगोंको विसर्जनके उपरान्त त्वरित झीलसे ‘कचरे’को हटानेका निर्देश दिया गया ।
उच्च न्यायालयका निर्णय, पर्यावरणके लिए एवं उत्सवोंके अनुरूप हेतु योग्य ही है; परन्तु यह न्यायालय तब कहां जाता है, जब हिन्दू धर्मके अतिरिक्त, अन्य पन्थोंपर निर्णय देना होता है ? क्या तब भी इस प्रकारसे, स्पष्ट एवं कठोरतापूर्वक सुनाया गया निर्णय देखनेमें आता है ? यह विचारणीय है ! उच्च न्यायायलको चाहिए कि समाजके प्रत्येक वर्गके लिए एक समान ही, न्यायपूर्वक तथा कठोरताके साथ निर्णय लिया जाए ! जिससे सामाजिक व्यवस्थामें समानता बनी रहे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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