भिन्न स्वाभावदोषोंको दूर करने हेतु दृष्टिकोण (भाग – ३)


अनुशासनहीनता
अपने अनुशासनहीनताको दूर करने हेतु सर्वप्रथम यह स्वीकार करें कि मुझमें अनुशासनहीनता, यह दुर्गुण है | जब तक हम यह स्वीकार नहीं करते हैं कि हमारे व्यक्तित्वमें यह दुर्गुण है तबतक स्वयंमें सुधार करना कठिन होता है; अतः अंतर्मुख होकर अपने दोषको स्वीकार करना, यह स्वयंमें सुधार लानेका प्रथम चरण है ।
हमारे भीतर अनुशासनहीनताका प्रमाण कितना है, यह भी देखें अर्थात दिनभरमें यदि मुझे दस ऐसे कृत्य करने होते हैं जिसमें अनुशासनबद्ध होना आवश्यक होता है और मुझसे आठ प्रसंगोंमें बारम्बार चूक होती है तो समझ लें कि स्वाभावदोषका स्वरुप गंभीर है अर्थात् उस दोषसे सम्बंधित संस्कार अत्यंत तीव्र हैं।  ऐसेमें सर्वप्रथम प्रतिदिन प्रमाणिक होकर अपनी चूकें स्वभावदोष निर्मूलन पुस्तिकामें लिखना आरम्भ करें, चाहे आप एक ही चूक (गलती, भूल) लिखें; किन्तु लिखना आरम्भ करें, इसमें हमारी whatsapp गुट ‘व्यक्तित्व विकास’ आपकी सहायता करेगा; क्योंकि इसमें अन्य व्यक्ति भी अपनी चूकें लिखते हैं, दूसरोंको नियमित चूकें लिखते देखनेसे हमें भी प्रेरणा मिलती है । आप हमारे इस गुटमें सहभागी हो सकते है, इस हेतु ९७१७४९२५२३ (9717492523) / ९९९९६७०९१५ (9999670915) में हमें व्यक्तित्व विकासगुटमें जोडें, यह सन्देश लिखकर भेज सकते हैं ।
आपसे दस दिन यदि नियमित चूकें लिखना आरम्भ हो जाए तो इस सम्बन्धमें योग्य कृति लिखना आरम्भ करें अर्थात् उस प्रसंगमें आदर्श वर्तन क्या होना चाहिए था (२६.१२.२०१७)



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