भिन्न स्वाभावदोषोंको दूर करने हेतु दृष्टिकोण (भाग – ४)


अनुशासनहीनता
भारतमें अनेक लोगोंमें समयबद्धता अर्थात् यथोचित समयपर सभी कृति करना, यह गुण नहीं होता, अतः यदि कोई कार्यक्रम सात बजेसे हो तो लोग आठ बजेसे आना आरम्भ करते हैं और कार्यक्रम नौ बजे आरम्भ होता है। यह आप सभीने अनुभव किया ही होगा। अनेक बार जब हम किसी विशिष्ट अथितिको अपने कार्यक्रम हेतु आमंत्रित करते हैं तो वे भी देरसे आते हैं फलस्वरूप सभीका समय नष्ट होता है और कार्यक्रममें भी देरी होती है। हमारे देशमें आज लोगोंको समयका मूल्य ज्ञात ही नहीं है, यहां तक कि शासकीय (सरकारी) विद्यालयमें भी अनेक बार शिक्षक और विद्यार्थी समयपर नहीं आते हैं तो इसप्रकार समयका पालन न करना यह एक प्रकारसे राष्ट्रीय समस्या है।
अनुशासनबद्ध व्यक्ति समयका पालन करता है और इसकारण उनकी कार्यकी परिणामकारकता (आउटपुट) अधिक होती है। किसी भी शासकीय विभाग और हमारी सेनाकी, यदि आप परिणामकारकता निकालेंगे तो निश्चित ही आपको ज्ञात होगा कि हमारे सैनिक उतने ही समयमें एक अनुशासनहीन शासकीय अधिकारीकी अपेक्षा अधिक कार्य करते हैं और इसका कारण हैं उनमें समयका पालन करना यह गुण आत्मसात करवाया जाता है। हमारे पिता भी प्रादेशिक सेनामें थे वे हमें बाल्यकालसे ही समयका महत्त्व बताते रहते थे और परिणामस्वरुप हमने अपने जीवनमें कभी समय व्यर्थ नहीं किया और समयके पालनपर विशेष ध्यान दिया। आज इसी गुणके कारण यद्यपि हमारे पास साधक संख्या सिमित है तथापि हम वैश्विक स्तरपर धर्मप्रसार कर पाते हैं हमें अनेक बार लगता है जैसे ईश्वर नित्य कुछ नूतन माध्यम दे देते हैं जिससे उतने ही समयमें हम अनके लोगोंको धर्म सिखा सकें; क्योंकि मुझे लगता है आपातकाल आरम्भ होनेवाला है और हमारे पास समय बहुत ही कम है।
सूक्ष्म जगतमें कार्य करने हेतु भी समयबद्धता रुपी गुणका होना अति आवश्यक होता है। जैसे सूक्ष्म युद्धमें मान्त्रिक (बलाढ्य आसुरी) कुछ क्षणोंमें ही निर्णय लेकर हमपर वार करते हैं और हमें उतने ही क्षणोंमें उनकी अगली योजना क्या हो सकती है इसका विचार कर, उनपर सूक्ष्मसे वार करना होता है। अनेक साधकोंको सूक्ष्म जगतके विषयमें बहुत जिज्ञासा रहती है तो ऐसे सभी लोग, समयका महत्त्व, इस गुणको आत्मसात करनेका प्रयास करें। समयका पालन करते समय आपमें पूर्व नियोजन करना, अनावश्यक बातें या कार्यको करना टालना, व्यवस्थित रहना ये गुण स्वतः ही आत्मसात हो जाते हैं, इसप्रकार यह गुण अनके दोषोंको दूर करनेमें सहायक सिद्ध होता है  – तनुजा ठाकुर (२७.१२.२०१७)



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