भिन्न स्वाभावदोषोंको दूर करने हेतु दृष्टिकोण (भाग – ६)


दोष : अनुशासनहीनता अन्तर्गत समयबद्धताका अभाव
अव्यवस्थिताके कारण नहीं  समयबद्ध रह पाना
मैंने ऐसा पाया है कि जिनमें समयबद्धताका अभाव होता है, उनमें पूर्व नियोजनका अभाव तो होता ही है, वे अत्यधिक अव्यवस्थित भी रहते हैं; फलस्वरूप उनका समय वस्तु ढूंढनेमें भी व्यर्थ होता है । जैसे घर आनेपर वाहनकी कुंजी(चाभी) यथास्थान न रखना एवं अगले दिवस कार्यालय जाते समय उसे ढूंढनेमें समय व्यर्थ होता है और कार्यालयमें समयपर नहीं पहुंच पाते हैं। इसप्रकार उनकेद्वारा वस्तुको यथास्थान न रखनेके कारण अन्योंको भी कष्ट होता है। व्यवस्थित रहनेसे किसी भी प्रसंगमें हमें मानसिक तनाव भी कम होता है; क्योंकि मन भी एक योग्य दिशामें विचार करना सीख जाता है।
जैसे किसीको प्रातःकाल नौ बजे कार्यालय जाना है तो यदि वह उसकी पूर्व सिद्धता करें एवं व्यवस्थित रहें और ऐसा करनेसे कार्यालय जाते समय उसे अपने आवश्यक वस्तुओंको ले जानेमें समय व्यर्थ नहीं होगा। उसके कक्ष, वस्त्र, वाहन, कपाटिका (अलमारी) सब व्यवस्थित होंगे। उसमें कोई भी वस्तुको उपयोग कर उसे यथास्थान योथोचित प्रकारसे रखनेकी वृत्ति होगी।  अतः समयबद्ध होने हेतु पूर्व नियोजन करना सीखें एवं व्यवस्थित रहना सीखें।  इसप्रकार समयबद्धताका अभाव, इस एक दोषको दूर करनेके क्रममें आपमें दो गुणोंका संवर्धन स्वतः ही होगा !- तनुजा ठकुर



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