जवाहरलाल नेहरू ‘बंदरगाह’ पर पकड़ाई १२५ कोटिकी (करोडकी) ‘हेरोइन’, मूंगफलीके तेलमें छिपा कर हो रही थी ‘तस्करी’


८ अक्टूबर, २०२१
      मूंगफलीके तेलकी खेपमें छिपाकर मुंबई लाई गई ‘हेरोइन’की बडी ‘खेप’को राजस्व गुप्त निदेशालयने नवी मुंबईके जवाहरलाल नेहरू ‘बंदरगाह’से प्राप्त किया है । इस  क्रममें ६२ वर्षीय व्यापारी जयेश संघवीको बन्दी बनाया गया है । यह घटना ४ अक्टूबर २०२१ की बताई जा रही है । पकडी गई ‘हेरोइन’ मुंबईके न्हावा शेवा ‘बंदरगाह’पर एक ‘कंटेनर’में छिपाकर रखी गई थी, जिसकी अन्तराष्ट्रीय हाटमें (बाजारमें) लगभग १२५ कोटि मूल्य आङ्की गई है । आरोपित जयेश यह ‘तस्करी’ किसी अन्य व्यक्तिके व्यापारिक ‘कोड’पर कर रहा था ।
      इस प्रकरणमें आरोपित व्यापारी जयेश संघवीको स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, १९८५ (‘एनदीपीएस’ अधिनियम १९८५) की विभिन्न धाराओंके अन्तर्गत बन्दी बना लिया गया है । प्रकरणसे सम्बन्धित ‘कंटेनर’ संदीप ठक्कर और वैभवद्वारा आयातित (इम्पोर्ट) बताया जा रहा है, जिनका कार्यालय मुंबईके ‘मस्जिद’ बंदर क्षेत्रमें बताया जा रहा है । ठक्करके अनुसार, वह आरोपी जयेशके साथ लगभग १५ वर्षसे कार्य कर रहा था और जयेशने ईरानसे १० सहस्र रुपए प्रति ‘कंसाइनमेंट’ सामान लानेकी बात कही थी ।
      इससे पूर्व जुलाई २०२१ में इसी जवाहरलाल नेहरू ‘बंदरगाह’से राजस्व गुप्त विभागद्वारा ही दो सहस्र कोटि रुपएकी ‘हेरोइन’की ‘खेप’ पकडी गई थी, जो ईरानसे ही लाई गई थी । ‘हेरोइन’की इस ‘खेप’को ‘सडक’ मार्गसे पंजाब भेजनेकी सिद्धता (तैयारी) थी, जिसकी जांचमें पंजाबके तरण तारण निवासी विक्रेता प्रभजीत सिंहको बन्दी बनाया गया था ।
       इस्लामिक राष्ट्रों सहित विश्वके सर्वोत्तम भौतिक दृष्टिसे विकसित राष्ट्रोंकी प्रजा सवार्धिक व्यासनाधीन है । निकृष्ट स्तरकी क्षणिक एवं प्राणिक समाधिके लिए मादक पदार्थोंपर आश्रित होकर सेवनकर मनुष्य जीवन व्यर्थ करना महामूढता है, मात्र सनातन धर्मानुसार आचरण, कर्म व योग्य साधनासे ही जीवका परिपूर्ण विकास होगा एवं ईश्वरमय परमानंद अवस्था सहज ही साध्य होती है, ऐसा विचारकर विश्वके सभी राष्ट्रोंको सनातन धर्मकी ओर उन्मुख होना अपरिहार्य है, इसीमें परमहित निहित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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