दुर्गा शक्तिकी उत्पत्ति तथा उनके चरित्रोंका वर्णन मार्कण्डेय पुराणांतर्गत देवी माहात्म्यमें है। यह देवी माहात्म्य 700 श्लोकोंमें वर्णित है। यह माहात्म्य ‘दुर्गा सप्तशती’ के नामसे जाना जाता है।
श्री दुर्गा सप्तशतीका पाठ मनोरथ सिद्धि एवं भगवतिकी कृपा संपादित करनेके लिए किया जाता है; क्योंकि श्री दुर्गा सप्तशती दैत्योंके संहारकी शौर्य गाथासे अधिक कर्म, भक्ति एवं ज्ञानकी त्रिवेणी हैं। यह श्री मार्कण्डेय पुराणका अंश है। यह देवी महात्म्य धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चारों पुरुषार्थोंको प्रदान करनेमें सक्षम है। सप्तशतीमें कुछ ऐसे भी स्तोत्र एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत पारायण से इच्छित मनोकामनाकी पूर्ति होती है।
* सर्वकल्याण एवं शुभार्थ प्रभावशाली माना गया है-
सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके ।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥
* बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्तिके लिए इस मंत्रका जाप फलदायी है-
सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥
* आरोग्य एवं सौभाग्य प्राप्तिके लिए इस चमत्कारिक फल देने वाले मंत्रको स्वयं देवी दुर्गाने देवताओंको दिया गया है-
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहिमे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥
* विपत्ति नाशके लिए-
शरणागतर्दनार्त परित्राण पारायणे।
सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽतुते॥
* ऐश्वर्य, सौभाग्य, आरोग्य, संपदा प्राप्ति एवं शत्रु भय मुक्ति-मोक्षके लिए-
ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य-आरोग्य सम्पदः।
शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥
* विघ्ननाशक मंत्र-
सर्वबाधा प्रशमनं त्रेलोक्यसयाखिलेशवरी।
एवमेय त्याया कार्य मस्माद्वैरि विनाशनम्॥
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