दुर्गा स्तुति


सौम्या सौम्यतराह्‌शेष सौम्येभ्यस त्वतिसुन्दरी ।
परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी ॥

अर्थ तुम सौम्य और सौम्यतर हो । इतना ही नहीं, जितने भी सौम्य और सुन्दर पदार्थ हैं, उन सबकी अपेक्षा तुम अधिक सुन्दर हो । परा और अपरा, सबसे पृथक रहनेवाली परमेश्वरी तुम्हीं हो ।



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