जनवरी ३१ २०१९
उत्तर प्रदेशमें ‘गोमती रिवरफ्रंट’ और अवैध खनन प्रकरणमें छापेमारी और पूछताछके पश्चात अब प्रवर्तन निदेशालयने स्मारक भ्रष्टाचारमें छापेमारी की है । निदेशालयके दलने लखनऊमें सात स्थानोंपर छापा मारा । ये छापेमारी नगरके हजरतगंज, गोमतीनगर, अलीगंज, शहीद पथ, आदि स्थानोंपर हुई । इसमे अभियन्ता, ठेकेदार और शासकीय अधिकारी लक्ष्यपर हैं ।
क्या है स्मारक घोटाला ?
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेशमें २००७ से २०१२ तक मायावती मुख्यमन्त्री थीं । इस मध्य उन्होंने अपनी, अपने चुनाव चिन्ह और कांशीरामकी प्रतिमा बनवाई थी । इसके अतिरिक्त लखनऊ-नोएडामें आम्बेडकर स्मारक परिवर्तन स्थल, मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल, गौतमबुद्ध उपवन, ईको पार्क, नोएडाका आम्बेडकर पार्क, रमाबाई आम्बेडकर मैदान और स्मृति उपवन सहित पाषाणके कई स्मारक तैयार कराए थे । ये सभी स्मारक शासकीय कोषसे बने थे, जिनपर ४३ अरब रुपये व्यय हुए थे । इनमेसे लखनऊ-नोएडा स्मारक बनानेमें लगभग ४२ अरब रुपये व्यय हुए थे । इसमे बडे स्तरपर भ्रष्टाचारके आरोप लगे थे ।
सत्ता परिवर्तनके टश्चात मुख्यमन्त्री अखिलेश यादवने लोकायुक्त एनके मेहरोत्राकी अध्यक्षतामें जांच समिति बनाई । लोकायुक्तकी जांचमें लगहग १४ अरब १० कोटि रुपयोंके भ्रष्टाचारकी बात सामने आई । प्रकरण जब उच्च न्यायालय पहुंचा तो न्यायालयने कहा था कि जनताके धनका दुरूपयोग करनेपर कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए । दोषी कितना भी बडा हो, उसके विरुद्घ कडी कार्यवाही होनी ही चाहिए । न्यायालयने जांचकी धीमी गतिपर भी प्रश्न किए थे और शासनसे पूछा था कि क्यों न इस प्रकरणकी जांच सीबीआई या एसआईटीको सौंप दी जाए ?
इसके पश्चात लोकायुक्तके कहनेपर मायावती शासनमें मन्त्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा सहित १९ लोगोंके विरुद्घ अभियोग प्रविष्ट किया गया । इसमें बडे स्तरपर भ्रष्टाचार हुआ था । पाषाणकी छंटनीके लिए लागतसे १० गुणा अधिक भुगतान किया गया था, जबकि मिर्जापुरसे मंगाए गए पाषाणको राजस्थानका बताया गया था !
उल्लेखनीय कि इसकी जांच विभाग और ईडी, दोनों ही कर रहे थे; परन्तु जांच आरम्भ होनेके कुछ समय पश्चात ही अखिलेशने इसपर रोक लगा दी थी, जिसके कारण ‘ईडी’ भी अपनी जांचको आगे नहीं बढा पाया था ।
“भ्रष्ट राजनेता अपनी निजी सम्पत्ति समझ देशको लूटते हैं और हमारा न्यायतन्त्र अपना समस्त बल हिन्दुओंके लिए लगाता है ! राजनेताने वर्षों पूर्व भ्रष्टाचार किया और वह अभीतक बाहर घूमकर चुनावी दहाडे लगा रहे हैं, इससे अधिक हास्यस्पद स्थिति इस विवश और असहाय लोकतन्त्रकी कुछ होगी क्या ? उसके पश्चात भी हम गर्वसे कहते हैं कि हम लोकतान्त्रिक है ! केवल मायावती ही क्यों, सीडब्लयूजी, कोयला आदि अनेकानेक भ्रष्टाचार हुए, किसीका भी कुछ बिगडा क्या ? चुनावसे पूर्व नेता आरोप-प्रत्यारोप करते हैं, तो चुनावके पश्चात ऐसा क्या हो जाता है ? अब स्पष्ट है कि इस विवश और जर्जर लोकतन्त्रसे कुछ नहीं हो सकता है; अतः अब हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अनिवार्य है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ईपोस्टमोर्टम
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