हसन, हैदर व इमदादिल सहित आठ अवैध बांग्लादेशी छद्म अभिज्ञानपत्रके (पहचानपत्र) साथ बनाए गए बन्दी


०८ जुलाई, २०२१
    आंध्र प्रदेशके राजा महेन्द्रवरम तथा विजयवाडा ‘रेलवे स्टेशन’पर शुक्रवार २ जुलाई २०२१ को ‘रेलवे सुरक्षा बल’ और ‘पुलिस’ने ८ अवैध बांग्लादेशी प्रवासियोंको अपनी बन्दी बना लिया है । समाचारपत्र ‘द हिन्दू’के प्रतिवेदनके अनुसार, ‘पुलिस’को गुप्तचर विभागके अधिकारियोंने यह सूचित किया था कि कुछ बांग्लादेशी नागरिकोंने भारतमें अवैध रूपसे प्रवेश किया है तथा वह ‘हावडा-चेन्नई मेल’ तथा ‘हावडा वास्कोडिगामा अमरावती एक्सप्रेस’से रेलयात्रा कर रहे हैं । ‘पुलिस’ने बताया कि वह चार-चार लोगोंके समूहमें यात्रा कर रहे थे तथा किसी जल निकासी ‘पाइप’के माध्यमसे भारतमें प्रविष्ट हुए थे । अब ‘पुलिस’ भी इस निकासी ‘पाइप’ व भूमिगत मार्गको ढूंढनेका प्रयास कर रही हैं । बन्दी बनाए गए सभी आरोपियोंकी आयु १९ से ३७ वर्षके मध्य है । गुप्तचर विभागके अधिकारियोंके अनुसार, ‘कोरोना’के प्रसारित होनेके पश्चात प्रतिबन्धोंमें दी गई ढीलके पश्चात ही इन्होंने भारतमें प्रवेश किया था तथा वह कथित रूपसे बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु व अन्य राज्योंके विभिन्न क्षेत्रोंके निर्माण स्थलोंपर ‘दिहाडी मजदूर’के रूपमें कार्यरत थे । इस प्रकरणमें चकित करनेवाला तथ्य यह है कि सभी अवैध प्रवासियोंके पास ‘पासपोर्ट’ नहीं है; परन्तु उनके पास ‘आधार कार्ड’, ‘पैन कार्ड’ और छद्म निवास स्थानवाले मतदानपत्र उपलब्ध थे । उल्लेखनीय है कि जून २०२१ में उत्तर प्रदेश ‘एटीएस’ने भी अवैध रूपसे भारतमें बांग्लादेशियोंकी घुसपैठ करानेके प्रकरणमें चार आरोपियोंको बन्दी बनाया था ।
       अवैध नागरिकोंका भारतमें प्रवेश बृहद स्तरपर चल रहा है; परन्तु कार्यवाहीमें केवल कुछ ही आरोपी पकडमें आ रहे हैं । केन्द्र शासनको चाहिए कि वह एक उच्चस्तरीय दलका गठनकर बंगालसे जुडे सभी राज्योंमें उच्च स्तरीय जांच करवाएं व बन्दी बनाए तथा सभी अवैध नागरिकोंको देशसे बाहर करें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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