हिन्दुओंको न्याय नहीं परन्तु दो निधर्मी महिलाओंके लिए २४ घंटोंमें सुनवाई और सुरक्षाका आदेश !!


जनवरी १८, २०१९

उच्चतम न्यायालयने केरल पुलिसको शुक्रवार, १८ जनवरीको आदेश दिया कि सबरीमला मंदिरमें प्रवेश करनेवाली दो महिलाओंको चौबीस घंटे सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए । प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल एन राव और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरीकी एक पीठने कहा कि वह केवल दो महिलाओंकी सुरक्षापर विचार करेगी और किसी अन्य अनुरोधकी सुनवाई नहीं करेगी ।


पीठने इस प्रकरणको सबरीमला मामलेकी लम्बित याचिकाओंके साथ जोडनेसे भी अस्वीकृत कर दिया।

उल्लेखनीय है कि कनकदुर्गा और बिंदूने इस माहके आरम्भमें पुलिस सुरक्षाके मध्य मंदिरमें प्रवेश किया था । इससे लगभग तीन माह पूर्व शीर्ष न्यायलयने भगवान अयप्पाके मंदिरमें १० से ५० वर्ष तककी महिलाओंके प्रवेशपर लगा प्रतिबंध हटानेका नार्णय सुनाया था।

 

“एक ओर जहां न्यायालय लाखों महिलाओंके साथ न्याय नहीं कर पाते हैं, अपराधी उचित दण्ड नहीं पाते हैं और यहां दो निधर्मी महिलाओंके लिए एक ही दिनमें सुनवाई और १४ घंटे सुरक्षा दी गई है ! यह सब संयोग मात्र तो नहीं हो सकता है । न्यायालय उत्तर दे कि सबरीमालामें जो महिलाएं सडकोंपर थीं, जो मृत हुई, क्या वे महिलाएं नहीं थीं ? अब इससे हिन्दुओंके विरुद्घ हो रहे षडयन्त्रकी दुर्गन्ध आ रही है । ऐसा प्रतीत होता है कि हिन्दुओंके आस्थाकेन्द्रोंको नष्ट करने हेतु एक षडयन्त्र चल रहा है, जिसमें हिन्दुवादी शासकोंका मौन शंका उत्पन्न करता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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