उत्तिष्ठ कौन्तेय !


इस देशके राज्यकर्ताको धर्म सिखाना है अति आवश्यक  
हमारा वैदिक शास्त्र कहता है कि मध्य रात्रिका काल असुरोंका होता है एवं दिवसका समय देवताओंका होता है; अतः हिन्दू सभी शुभ कार्य दिनमें करते हैं; किन्तु इस देशमें सब कुछ धर्मविरुद्ध होना अब एक चलन(फैशन) हो गया है | अनेक ज्योतिषियोंने जवाहरलाल नेहरुको मध्य रात्रि स्वतंत्रता मिलनेकी घोषणा करने हेतु मना किया था तथापि “By culture a Muslim, and I am a Hindu only by accident of birth” कहनेवाले नेहरुने किसीकी बात नहीं मानी और आज स्वतन्त्र भारतकी दुर्गति किसीसे छिपी नहीं है |
कमसे कम हिन्दुत्वके नामपर मत बटोरकर केंद्रपर शासन करनेवाली भाजपासे यह आशा नहीं थी कि वह राष्ट्रहित हेतु लिए गए इतने महत्त्वपूर्ण आर्थिक निर्णयका शुभारम्भ आसुरी कालमें करेगी ! अतएव हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अब अपरिहार्य हो गया है, जहां राज्यकर्ता धर्म अधिष्ठित कार्य करेंगे फलस्वरूप राष्ट्रका सर्वागींण उत्कर्ष होगा | – तनुजा ठाकुर (१.७.२०१७)



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