अन्य धर्मोंपर अपमानजनक टिप्पणीका अर्थ है घृणाके बीज बोना, विष वमन करनेवाले ईसाई उपदेशककी क्षमाके पश्चात प्राथमिकी निरस्त
०७ फरवरी, २०२१
मद्रास उच्च न्यायालयने ईसाई उपदेशक मोहन सी लाजारूसको कडी फटकार लगाते हुए उसके विरुद्ध प्रविष्ट प्राथमिकी निरस्त कर दी है । न्यायाधीश आनंद वेंकटेशकी एकल पीठने प्रकरणकी सुनवाई करते हुए कहा कि किसी अन्य धर्मके विषयमें अपमानजनक टिप्पणी देनेका अर्थ है, घृणाके बीज बोना । न्यायालयने कहा कि एक बहुलतावादी समाजमें दूसरे पन्थोंके प्रति सहिष्णुता और सम्मान होना चाहिए ।
लाजरूस ‘जीसस रेडीमस मिनिस्ट्री’ नामक संस्थाका संस्थापक है । उसने अपनी टिप्पणीके लिए क्षमा मांगी, जिसके पश्चात उसके विरुद्ध प्रविष्ट प्राथमिकीको निरस्त किया गया । इस मध्य उसे न्यायालयने उससे कहा कि अपने पन्थके लिए उपदेश देनेका अधिकार है; परन्तु कुछ सीमाएं भी हैं, जिससे दूसरोंका अपमान न हो । न्यायालयने ईसाई उपदेशककी टिप्पणीकी भी निन्दा की । न्यायालयने अपनी टिप्पणीमें कहा कि यदि वो कोई ऐसा वक्तव्य देता है कि जिसमें किसी दूसरे सम्प्रदायके प्रति अपमानकी बात हो, तो इससे समाजमें घृणा फैलेगी । न्यायालयने ये भी स्मरण दिलाया कि प्रत्येक धर्मके प्रभावशाली लोगोंके पास क्षमता होती है कि वह व्यक्तिके आन्तरिक विकासको प्रभावित कर सकें । न्यायालयने कहा कि आध्यात्मिकता ये दिखानेकी प्रतिस्पर्धा नहीं है कि हमारा धर्म तुम्हारेसे श्रेष्ठ है ।
मोहन सी लाजारूसने हिन्दू धर्म और मूर्तिपूजनके विरुद्ध विवादित वक्तव्य दिया था । ये प्रसङ्ग २०१६ में दिए गए उसके वक्तव्यसे जुडा हुआ था । लाजारूस सुनामीको मूर्तिपूजकोंके विरुद्ध ईश्वरका क्रोध मानता है । वह भारतमें निर्धनताके लिए भी मूर्तिपूजाको ही उत्तरदायी मानता है । एक हिन्दू परिवारमें जन्म लेनेवाले मोहन सी लाजारूसका कहना है कि हृदय रोग ठीक होनेके पश्चात वह ईसाई बना ।
ईसाई सङ्गठनोंका मुख्य उद्देश्य भारतमें ईसाई धर्मका प्रचार एवं अपने अनुयायियोंकी संख्यात्मक रूपसे वृद्धि करना है । हिन्दुओंकी सहिष्णुताका लाभ ईसाई मिशनरियों व जिहादी मानसिकतावाले व्यक्ति उठा लेते हैं और अनर्गल वक्तव्य कहते रहते हैं । हिन्दुओंको मूर्तिपूजक कहते हैं और स्वयं ईसाकी मूर्ति लगाकर पूजा करते हैं । न्यायालयके सम्मुख मात्र क्षमा मांगनेसे उस निधर्मीको मुक्त नही करना चाहिए था । न्याय व्यवस्था तभी तटस्थ होकर कार्य करेगी, जब भारत हिन्दूराष्ट्र बनेगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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