दो दशकसे बन रहे इस चिकित्सालयका श्रेय लेने हेतु केजरीवाल शासनने चिकित्सालयको अबतक नहीं किया आरम्भ
०७ मई, २०२१
कोरोना महामारीकी दूसरी लहरके मध्य देशकी राजधानी देहलीमें जहां लोग चिकित्सालयमें एक-एक ‘बेड’के लिए व्याकुल रहे हैं, वहीं अरविंद केजरीवाल शासनके कपटसे देहली स्थित द्वारकामें १७३५ शैय्याका एक अतिविशिष्ट चिकित्सालय धूल खा रहा है ।
लगभग दो दशकोंसे बनते आ रहे और अब राजनीतिक कारणोंसे उद्घाटनकी प्रतीक्षा कर रहे, इस पूर्ण सुसज्जित चिकित्सालयका प्रयोग यदि ‘कोविड सेंटर’के रूपमें किया जाए तो देहली निवासियों तथा रोगियोंको बडी सहायता प्राप्त हो सकती है ।
वर्ष २०१८से ही केजरीवाल शासन इसका श्रेय लेता आ रहा है; परन्तु रिक्त पडे इतने अतिविशिष्ट चिकित्सालयको ‘कोविड सेंटर’के रूपमे प्रयोग करनेका विचार देहली शासनको अब तक नहीं आया है ।
यदि केजरीवालको देहली निवासियोंकी थोडी भी चिन्ता होती तो वे श्रेय लेनेके साथ ही जनताका हित भी करते; परन्तु उन्हें तो मात्र जनताके धनसे स्वयंका प्रचार करवानेमें ही आनन्द आता है । ऐसे व्यक्तिका पुनः मुख्यमन्त्री चुना जाना, दर्शाता है कि लोकतन्त्र कितना विसंगतिपूर्ण है ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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