०२ दिसंबर, २०२०
देहलीमें चल रहे किसान ‘आन्दोलन’में अपना समर्थन देनेके लिए ‘भीम-मीम’ एक बार पुनः एक साथ खडे हैं । ‘टाइम्स नाउ’की जानकारीके अनुसार, एक ओर जहां भीम आर्मीके मुख्य चन्द्रशेखर रावण ‘गाजीपुर बार्डर’पर पहुंच चुके हैं, तो वहीं शाहीन बागकी दादी बिलकिसने कहा है कि ये किसान उनके प्रदर्शनमें (शाहीन बागमें) उनके साथ जुटे थे; अब समय है कि इनका साथ दिया जाए !
कांग्रेस नेता उदित राजका भी इस मध्य वक्तव्य आया है । उदित राजने कहा है कि वो किसानोंकी मांगोंका समर्थन करते हैं; परन्तु किसानोंके विरुद्ध फैलाए जा रहे प्रचारका विरोध करते हैं ।
शाहीनबाग और किसान आन्दोलनमें एक जैसे लोग
हैं । केन्द्र शासनद्वारा वर्तमानमें ही लाए गए कृषि सुधार विधानको लेकर प्रस्तुत किसानोंके ‘विरोध प्रदर्शन’में धीरे-धीरे वे सभी लोग एक साथ आ रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों शाहीन बाग जैसे आन्दोलनका समर्थन किया था ।
अभी वर्तमानमें जानकारी मिली है कि जिन लोगोंने ‘जेएनयू’में हिंसाको बढावा दिया था, देहली उपद्रवके मध्य जिहादियोंको भडकाया था, वही हरियाणा-पंजाब सीमापर चल रहे इस ‘किसान आंदोलन’को भी उपद्रवमें परिवर्तित कर रहे हैं !
सहस्रों व्यक्तियोंके देहली जानेके उपरान्त हरियाणाकी सिंधु सीमापर पुलिसकी नियुक्ति बढा दी गई है । ‘रावण’के पहुंचनेकी जानकारी मिलनेके पश्चात कई लोग ‘सोशल मीडिया’पर प्रदर्शन स्थलपर हिंसा भडकनेकी आशङ्का बता रहे हैं । उनकी चिंता है कि कहीं निरपराध किसान अपराधियों और पुलिसके मध्य टकरावमें मारे न जाएं ।
शाहीन बागके किसान आन्दोलनमें बिरयानी इस ‘वीडियो’को देखनेके पश्चात कुछ ही समयमें अत्यधिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं; क्योंकि इस दृश्यने लोगोंकी शाहीन बागकी स्मृति पुनः प्रगट कर दी, जब विगत वर्ष दिसम्बर मासमें समस्त जिहादी ‘सीएए और एनआरसी’के तथाकथित ‘विरोध’में धरनेपर बैठे थे ।
उल्लेखनीय है कि ‘एसएफजे’के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नूने किसानोंके लिए १० ‘मिलियन डालर’की वित्तीय सहायताकी घोषणा की थी, जिन्हें देहलीकी यात्राके मध्य किसी भी तरहकी हानि हुआ हो । वर्तमानमें ही ‘अपलोड’ किए गए एक ‘वीडियो’में पन्नूने किसानोंसे उनको हुए क्षतिका ब्यौरा भेजनेके लिए कहा था, जिससे उनका सङ्गठन राशिकी क्षतिपूर्ति कर पाए ।
कांग्रेस, भीम-मीम व खालिस्तानी, ऐसे अन्य देश विरोधी पार्टियोंके सम्पर्कमें आकर किसान अपनी हानि कर रहे हैं । ऐसे देश विरोधियोंपर शासनद्वारा दण्डात्मक कार्यवाही होनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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