‘किसानोंकी भांति प्राण त्यागनेके लिए तत्पर रहें’, फारूक अब्दुल्लाने ३७० की ‘वापसी’के लिए लोगोंको ‘भडकाते’ हुए कहा, “पर्यटन बढना सब कुछ नहीं”


०६ दिसम्बर, २०२१
       मोदी-शासनने जबसे तीन कृषि विधानोंको ‘वापस’ लेनेकी घोषणा की है, तभीसे जम्मू-कश्मीरके नेताओंको अनुच्छेद ३७० को पुनर्जीवित करनेके लिए आशाकी एक किरण दिखने लगी है । कृषि विधानोंके निरस्त होनेके उपरान्त, जिस प्रकारसे ‘कश्मीरी’ नेता वक्तव्य दे रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि इन नेताओंको यह लगने लगा है कि वह भी एक दिन ३७० को पुनः पुनर्जीवित करवा लेंगे । इसी क्रममें रविवार, ५ दिसम्बर २०२१ को ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’के नेता फारुक अब्दुल्लाने कहा कि जिस प्रकारसे ७०० किसानोंके प्राण-त्यागनेके बाद केन्द्रको कृषि विधानोंको निरस्त करना पडा है, उसी प्रकारसे केन्द्रद्वारा छीने गए अपने अधिकारोंको ‘वापस’ पानेके लिए हमें भी प्राण-त्यागनेके लिए तत्पर रहना पडेगा ।
      फारूक अब्दुल्लाने हजरतबलमें अपने अब्बू शेख अब्दुल्लाकी पुण्यतिथिके अवसरपर अपनी दलके कार्यकर्ताओंको सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक नेता और कार्यकर्ताको गांव और क्षेत्रके व्यक्तियोंके सम्पर्कमें रहना होगा । उन्होंने कहा कि यह स्मरण रखना चाहिए कि हमने राज्यको अनुच्छेद ३७० और ३५-‘ए’ देनेकी प्रतिज्ञा की है और इसके लिए हम कोई भी आहुति देनेके लिए तत्पर रहें ।
       यह भ्रष्ट राजनेताओंकी तुष्टीकरणकी राजनीतिका ही परिणाम है कि कुछ राजनेता जनता एवं अपने दलके कार्यकर्ताओंको असंवैधानिक एवं देशको तोडनेवाली मांगोंके लिए धरना-प्रदर्शन प्रेरणा दे रहे हैं, जो वस्तुतः देशद्रोह है और इससे सतर्क रहना आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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