जनवरी २१, २०१९
मध्य प्रदेशके झाबुआ जनपदमें १७ वर्षीय आदिवासी छात्राकी आत्महत्या प्रकरणमें एक गिरिजाघरके पादरीको बन्दी बना लिया गया है । पादरीपर आरोप है कि वह छात्रापर विवाह करनेका दबाव बना रहा था, जिससे उद्विग्न होकर छात्राने कथित रूपसे आत्महत्या कर ली थी । छात्राने ये सारी बातें एक आत्महत्यासे पूर्व एक लेखमें लिखी ।
रानापुर पुलिस थाना प्रभारी कैलाश चौहानने बताया, “ छात्राको आत्महत्याके लिए प्रेरित करनेके लिए पादरी प्रकाश डामोरपर भारतीय दण्ड संहिताकी धारा-३०६ और ‘पॉक्सो अधिनियम’के अन्तर्गत मंगलवार, १५ जनवरीको प्रकरण प्रविष्ट करके उन्हें बन्दी बना किया गया । पादरीको मंगलवार, २१ जनवरीको ही न्यायालयमें प्रस्तुत किया गया, जहांसे उन्हें कारावास भेज दिया गया ।”
उन्होंने कहा, “११वींमें पढनेवाली १७ वर्षीय लडकीने ४ जनवरीको अपने घरमें कथित रूपसे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी । उसने लेखमें लिखा है कि ३३ वर्षीय पादरी उसपर विवाह करनेके लिए दबाव बना रहा है !” चौहानने बताया कि इस प्रकरणकी जांच उप निरीक्षक सी.एल. चौहानने की थी और जांच पूर्ण होनेपर आरोपीके विरुद्घ कार्यवाही की गई ।
उन्होंने आगे बताया, “लडकी मिशनरी विद्यालयमें पढती थी और वहीं विद्यालय छात्रावासमें रहती थी । वहींपर प्रकाशकी उससे पहचान हुई थी ।” इसी मध्य, झाबुआ कैथलिक डायोसिसके प्रवक्ता फादर रॉकी शाहने कहा, “फादर प्रकाश डामोर निर्दोष हैं । मुझे सूचना मिली है कि इसमें ठीक जांच नहीं हुई है । हम इस प्रकरणकी सघन जांचकी मांग करते हैं, ताकि वास्तविक अपराधीको दण्डित किया जा सके ।”
“धर्म व मिशनरीका तो केवल नाम है, मिशनरियोंका वास्तविक मिशन केवल अपनी वासनापूर्ति करना ही है । समूचे विश्वसे पादरियोंके ननोंसे दुष्कर्मके प्रकरण उजागर होते रहते हैं और जहां ननसे बात नहीं बनती, वहां बच्चियोंपर कुदृष्टि डालकर दुष्कर्म करते हैं । इससे ही इस तथाकथित पन्थके आधारका बोध होता है । जिस पन्थका मूल आधार ही छल-बलसे लोगोंको परिवर्तित करना हो, तो आत्मा तो दूरस्थ गन्तव्य है, वह शरीरसे ऊपर ही कैसे सोच सकता है और जो शरीरकी वासनाओंपर ही ध्यान दें, वह धर्म नहीं, व्यापार है; अतः सभी सनातनी भाई-बहन इन ईसाई आक्रान्ताओंका विरोध करें व शासन इस प्रकरणमें कडी कार्यवाहीकर इस पादरीको दण्ड दें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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