महामारीका उपचार ज्ञात कीजिए, रामदेवके नामपर न्यायालयका समय व्यर्थ मत कीजिए : उच्च न्यायालय
०४ जून, २०२१
देहली उच्च न्यायालयने रामदेव तथा ‘आईएमए’के मध्य चल रहे विवादमें कहा है कि रामदेवका ‘एलोपैथी’के विषयमें वक्तव्य देना उनके स्वयंके विचार हैं । न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहता तथा ‘आईएमए’ इन विषयोंको छोडकर महामारीको नियन्त्रण करनेमें अपने समयका निवेश करे ।
‘आईएमए’ बृहस्पतिवार ३ जून २०२१ को उच्च न्यायालयमें अपनी इस मांग के लिए पहुंचा कि पतञ्जलि आयुर्वेदके ‘कोरोनिल’ प्रकरणमें असत्य वक्तव्यके प्रसारको प्रतिबन्धित किया जाए ।
इसके उत्तरमें जस्टिस शंकरने कहा “कोई भी कह सकता है कि किसीको विज्ञानमें विश्वास नहीं है यह एक व्यक्तिगत सुझाव है । मान लीजिए कि मैं एक वक्तव्य देता हूं कि होम्योपैथी उपचार असत्य है । क्या इसके कारण ‘होम्योपैथ’ संघ मुझपर परिवाद करने आ सकते हैं ? आप इन वक्तव्यों पर प्रतिबन्ध नहीं लगा सकते ।”
न्यायालयने ‘आईएमए’को फटकार लगाते हुए कहा कि लोगोंकी बातोंमें आकर अपना और न्यायालयका समय व्यर्थ करनेके अतिरिक्त आप अपना समय महामारीका उपचार ज्ञात करनेमें लगाएं ।
उच्च न्यायालयद्वारा यह योग्य निर्णय दिया गया है । ‘आईएमए’को स्वयंके दोषोंको देखना चाहिए । न कि हम आयुर्वेदको असत्य बताएं । यह एक लाखों वर्ष प्राचीन पद्धति है और ‘एलोपैथी’ को कुछ शतक हुए हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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