राणा अयूबके विरुद्ध ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ और ‘धोखाधडी’को लेकर उत्तर प्रदेशमें प्राथमिकी प्रविष्ट


१० सिंतबर, २०२१
      उत्तर प्रदेशमें जनपद गाजियाबादके इंदिरापुरम ‘थाने’में ७ सितम्बरको हिन्दू सूचना तकनीकी विभागके विकास शाकृत्यायनने विवादित पत्रकार, राणा अय्यूबके विरुद्ध ‘मनी लॉन्ड्रिंग’, ‘धोखाधडी’, सम्पत्तिमें ‘हेराफेरी’, आपराधिक विश्वासघात करते हुए अवैध रूपसे दानके नामपर सामान्य जनमानससे धनकी उगाहीका (वसूलीका) आरोप लगाते हुए प्राथमिकी प्रविष्ट कराई है ।
      परिवादके आधारपर आरोपी राणाके विरुद्ध ‘आईपीसी’की धारा ४०३, ४०६, ४१८, ४२०, ‘आईटी’ अधिनियमकी धारा ६६-‘डी’ एवं ‘मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’-२००२ की धारा ४ के अनुसार, प्राथमिकी प्रविष्ट की गई है ।
      यह प्रकरण धन एकत्रित करनेवाले माध्यम, ‘केटो’पर चलाए गए तीन अभियानोंसे सम्बन्धित है । ये ‘कैंपेन’ झुग्गीवासियों और किसानों, असम, बिहार एवं महाराष्ट्रमें ‘राहत’ कार्य तथा भारतमें ‘कोविड’-१९ से प्रभावित लोगोंकी सहायताके नामपर चलाया गया था । आरम्भसे ही, राणाका यह प्रकरण सन्देहके घेरे में था; क्योंकि उन्होंने ‘एफसीआरए’की अनिवार्य अनुमतिके बिना ही, विदेशसे दानकी उगाही की थी ।
      इस विषयमें विगत माह ‘केटो’ने इन अभियानोंके लिए दान करनेवालोंको इस बातकी जानकारी दी थी कि राणा अय्यूबद्वारा जुटाए गए धनकी जांच चल रही है । बताया गया था कि दान अधिक होनेके पश्चात, उसका उचित उपयोग नहीं हुआ एवं इस दानका अत्यधिक भाग अब भी अधिकोशमें ही है ।
      उपर्युक्त प्रकरणमें दोषी पाए जानेपर उचित कार्यवाही करते हुए, कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए । समाजकी भावनाओंसे खिलवाड करनेका किसीको कोई अधिकार नहीं है एवं समाजको भी सोच समझकर ही अनुदान देना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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