बद्रीनाथ धामको बदरुद्दीन शाह कहनेवाले देवबंदी मौलानापर उत्तराखंडमें प्राथमिकी


२८ जुलाई, २०२१ 
 
      उत्तर प्रदेशके सहारनपुरमें बने दारुल उलूम देवबंदके मौलाना अब्दुल लतीफ कासमीका एक दृश्यपट ‘सोशल मीडिया’पर सार्वजनिक होनेके पश्चात उत्तराखंडके देहरादूनमें उसके विरुद्ध प्राथमिकी प्रविष्ट की गई है ।
      २७ जुलाई, बुधवारको प्राथमिकीमें परिवादकर्ता आचार्य जगदम्बा प्रसाद पन्तने मौलवीपर हिन्दुओंकी धार्मिक भावनाओंको आहत करनेका आरोप लगाया है । उन्होंने कासमीपर हिन्दू मन्दिरके विरुद्ध मिथ्या और आपत्तिजनक प्रतिवाद करनेका आरोप लगाया । उन्होंने कहा है कि मौलवीने मन्दिरपर प्रतिवाद करके साम्प्रदायिक अवसादको (तनावको) उग्र करनेका प्रयास किया है; यद्यपि उनके और उनके परिवार सहित कई हिन्दुओंके लिए अत्यन्त पवित्र है ।
     उल्लेखनीय है कि जिस दृश्यपटको लेकर परिवाद किया गया है, वह वर्ष २०१७ की है । उसमें देवबंदी मौलाना अब्दुल लतीफ कहता दिख रहा है कि बद्रीनाथ धाम हिन्दुओंका तीर्थ स्थल नहीं; अपितु मुसलमानों का है । वह कहता है, “वास्तविकता तो ये हैं कि वे बद्रीनाथ नहीं, बदरुद्दीन शाह है । ये मुसलमानोंका धार्मिक स्थल है, इसीलिए इसे मुसलमानोंको सौंप दिया जाना चाहिए । ये बद्रीनाथ नहीं हैं । नाथ लगा देनेसे वे हिन्दू हो गए क्या ? वो बदरुद्दीन शाह हैं । इतिहासका अध्ययन कीजिए, मुसलमानोंको उनका धार्मिक स्थल चाहिए ।”
       मौलाना अब सार्वजनिक रूपसे हिन्दुओंकी आस्थापर आघात करने लगे हैं । क्या अब भी हम हिन्दू-मुसलमान ‘भाईचारे’की ही रट ही लगाते रहेंगे ? यदि हिन्दू समाज इस ‘भाईचारे’के रस्सीसे स्वयंको मुक्त न कर पाया तो, भविष्यमें हिन्दू सभ्यताका अंश नही मिलेगा । यह विचारकर सभी हिन्दू अपनी संस्कृतिके रक्षण हेतु सज्ज हो जाएं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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