जरासन्धके कारावासमें मकबरा होनेके प्रकरणपर हिन्दुओंपर ‘पीएफआईने कराई प्राथमिकी प्रविष्ट
०३ मार्च, २०२१
बिहारके नालन्दा जनपदमें हिन्दुओंपर ‘पीएफआई’द्वारा प्राथमिकी प्रविष्ट कराई गई है । वहांके हिरण्य पर्वतको लोगोंने जरासन्धका प्राचीन कारावास बताया । उस पर्वतपर बने मकबरेको उन्होंने अवैध बताया । उसका चित्र ‘फेसबुक’पर डालकर कहा कि यहांपर भगवान शिवका मन्दिर है और उससे कुछ ही दूरीपर, महाभारतकालीन जरासन्धके कारावासकी भित्तियां ढह जानेपर वहां ६५० वर्ष पूर्व इब्राहिम बयांद्वारा मकबरा बनाया गया था । जरासन्धके कारावासमें मकबरेका निर्माण कैसे हुआ ? मुसलमानोंने हिन्दुओंके प्रतीकोंको तोडकर मजार बना डाली । इस मजारके चित्रको ‘फेसबुक’पर प्रेषित करनेसे और वहांपर बने ढांचेके स्थानपर पुनः मन्दिर प्रतिष्ठित करनेकी ‘पोस्ट’को लेकर मुसलमान भडक गए । परिवाद करनेपर पुलिसने स्वयं ही हिन्दुओंपर प्राथमिकी प्रविष्ट कर दी । हिरण्य पर्वतको मुसलमानोंने पीर पर्वत कहकर उसे अपना क्षेत्र बताया और भडक गए । मुसलमानोंने उन हिन्दुओंको काट डालनेकी धमकियां दी हैं । माधवलालके अनुसार ‘पीएफआई’ बिहारमें बहुत तीव्रतासे फैल रहा है । उसने चेतावनी दी कि कश्मीर, बंगाल और केरलके पश्चात बिहारमें उनका दबाव बहुत बढ गया है । पटनाके अशोक राजपथपर माता सरस्वतीकी शोभायात्रा निकालनेका अधिकार अब हिन्दुओंसे छीन लिया गया है ।
‘पीएफआई’ पूर्वमें भी देहलीमें अनेकों प्रकरणोंमें उपद्रवोंमें सहभागी रहा है । हाथरसके उपद्रवोंके षड्यन्त्रमें भी इन्हींके सदस्य सम्मिलित पाए गए थे । केरलमें भी प्रतीकात्मक समारोहोंमें भी इन्होंने हिन्दुओंको हाथोंमें बेडियां डालकर घुमाया था । ऐसे आतङ्कवादी सङ्गठनोंकी फैलती गतिविधियोंको देखते हुए, शासनद्वारा इनपर त्वरित कार्यवाही कर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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