असमसे पांच रोहिंग्याओंको वापस म्यांमार भेजा, राष्ट्रवादियोंकी मांग, सभीको ढूंढकर वापस भेजे शासन !


जनवरी ४, २०१८


एक रोहिंग्या परिवारके पांच सदस्योंको गुरुवार, ४ जनवरीको म्यांमार वापस भेज दिया गया । अधिकारियोंने तीन माह पूर्व भी सात अन्य रोहिंग्या लोगोंको पडोसी देश वापस भेजा था । असमके अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीमा) भास्कर ज्योति महंतने बताया कि इन लोगोंको मणिपुरमें अन्तर्राष्ट्रीय सीमापर म्यांमारके अधिकारियोंको सौंप दिया गया ।

महंतने कहा, “इन्हें बिना यात्रा लिखितपत्रके पांच वर्ष पूर्व पकडा गया था और इनपर विदेशी विधानका उल्लंघन करनेका प्रकरण प्रविष्ट किया गया था ।” ये कारावासका दण्ड पूर्ण करनेके पश्चखत तेजपुर बन्दी केन्द्रमें बंद थे । इन्हें पुलिस एक बससे म्यांमारकी सीमातक लेकर गई । उल्लेखनीय है कि केन्द्रका एनडीए शासन रोहिंग्या मुसलमानोंको अवैध प्रवासी मानती है और देशकी सुरक्षाके लिए उन्हें एक संकटकी भांति देखती है । शासनने आदेश दिया है कि रोहिंग्या समुदायके भारतमें अवैध रूपसे रह रहे सहस्रों लोगोंका अभिज्ञान किया जाए और वापस भेजा जाए ।

गत वर्ष अक्टूबरमें भारतने प्रथम बार सात रोहिंग्याओंको वापस म्यांमार भेजा था, जो शरणार्थी शिविरोंमें रह रहे थे । भारत शासनका अनमुान है कि यहां लगभग ४०००० रोहिंग्या विभिन्न भागोंमें शिविरोंमें रह रहे हैं ।

गुरुवारको जिस परिवारको वापस भेजा गया, उसमें पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे हैं । उन्हें वर्ष २०१४ में असममें बन्दी बनाया गया था ।

 


“क्या केवल पांच अथवा सात रोहिंग्याओंको भेजनेसे देशपर आया संकट टलेगा ? सहस्रों रोहिंग्या देशमें यत्र-तत्र फैले हुए है, जो देशके लिए संकट हैं और जिनके आतंकी संगठनोंसे मिलनेके समाचार भी आए हैं, उन्हें शासन त्वरित राष्ट्रसे बाहर करे, यही राष्ट्रहितमें है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : आजतक



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