नसीरुद्दीन शाहके ‘बचाव’में पांच अर्थहीन तथ्योंके साथ सामने आई स्तम्भ लेखक (कॉलमनिस्ट) तवलीन सिंह


५ सिंतबर, २०२१
 ‘बॉलीवुड’ अभिनेता नसीरुद्दीन शाहद्वारा अफगानिस्तानमें ‘तालिबान’की विजयका उत्सव मनानेके लिए भारतीय मुसलमानोंकी आलोचना करनेके पश्चात अनेक भारतीय मुसलमान, तथाकथित ‘लिबरल-वामपन्थी’ पत्रकारों सहित कट्टरपन्थी मुसलमानोंकी ‘लॉबी’ पुरस्कार विजेता अभिनेताको अपशब्द देने और लताडनेके लिए सार्वजनिक रूपसे ‘सोशल मीडिया’पर निर्लज्जतापर उतर आई ।
 बता दें कि नसीरुद्दीन शाहने एक दृश्यपट प्रस्तुतकर, भारतीय मुसलमानोंसे शान्ति और अहिंसाका पालन करने और कट्टरपन्थी असभ्य इस्लामी समूहका समर्थन नहीं करनेके लिए कहा था । तवलीन सिंहने नसीरुद्दीन शाहपर अपने लेखमें पांच सर्वथा अर्थहीन तथ्य कहे हैं ।
 वह अपने लेखमें प्रतिवाद (दावा) करती है, “दाढीवाले ‘मुल्लाओं’द्वारा एक साथ आक्रमण, कोई आश्चर्यकी बात नहीं थी ।” अविश्वसनीय रूपसे ‘द वायर’की पत्रकार, जो शाहद्वारा युवा भारतीय मुसलमानोंको ‘तालिबान’का महिमामण्डन करनेके विरुद्ध चेतावनी देनेसे रूष्ट थी, वह भी एक ‘दाढीवाला मुल्ला’ है ।
 वह कथित ‘हेट क्राइम’की घटनाके विषयमें बात करती हैं, जहां ‘जय श्रीराम’का उद्घोष नहीं लगानेपर मुसलमान युवकोंको पीटा जाता है । इसका वर्णन करते हुए उनको विस्मरण हुआ हैं; क्योंकि अधिकतर घटनाओंमें यह असत्य ही निकला ।
 तवलीन ‘भारतीय इस्लाम’के विषयमें कहती हैं, “शाह उचित कहते हैं, जब वे कहते हैं कि भारतीय इस्लाम एक ऐसे धर्मके रूपमें विकसित हुआ, जो आधुनिकतासे सर्वोत्तम रूपसे निपटता है; इसलिए, एक ‘प्राइमटाइम शो’में हिन्दुत्वकी एक प्रमुख घोषणाको सुनकर मुझे झटका लगा कि केवल एक प्रकारका इस्लाम और एक ही प्रकारका मुसलमान था; तत्पश्चात उन्होंने ‘कुरान’की ‘आयतों’की संख्याका वर्णन किया, जो ‘काफिरों’ और नास्तिकोंके विरुद्ध हिंसाका परामर्श देती हैं ।”
 तवलीन सिंहने बिना स्पष्ट किए, भारतीय मुसलमानोंको दोष देनेका प्रयास किया और उनके धार्मिक अभिज्ञानको (पहचानको), अयोध्यामें राम जन्मभूमिपर विवादित ढांचेके विध्वंसका परिणाम बताते हुए कहा कि इसे बहुधा ‘बाबरी मस्जिद’ कहा जाता है । ६ दिसम्बर १९९२ को संरचनाको ध्वस्त कर दिया गया था, जिससे देशमें व्यापक साम्प्रदायिक उपद्रव हुए । वह कश्मीरमें ९० के दशकके विषयमें बात करती है; परन्तु बडी धूर्ततासे कश्मीरी हिन्दू पलायनकी उपेक्षा करती है, जहां मुसलमानों और पाकिस्तानद्वारा समर्थित आतङ्कवादियोंने हिन्दुओंको उनके घरोंसे भगा दिया ।
 तवलीनने अन्तमें कहनेके लिए अत्यन्त अर्थहीन तथ्योंको सहेजकर रखा था । अन्त में, उनका प्रतिवाद (दावा) है कि भारतीय मुसलमानोंने ‘आधुनिक विश्वके साथ उत्तम व्यवहार’ किया है और उन्होंने भारतीय धर्मोंसे बहुत कुछ सीखा है ।
      आजके बुद्धिभ्रष्ट स्तम्भ लेखक, मनानुसार अनर्गल तथ्य लिखकर, समाजका समय और विचार शक्तिको नष्ट करनेका प्रयास करते रहते है, ऐसे लोगोंका अभिज्ञानकर, सार्वजनिक रूपसे इनके लेखोंका बहिष्कार करना चाहिए, जिससे समाज अपनी मानसिक और वैचारिक ऊर्जाको संरक्षितकर, राष्ट्र निर्माणमें अपना सहयोग प्रदान कर सके । यही एक मात्र पर्याय है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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