फ्रांसने अपने नागरिकों और उद्योगोंको पाकिस्तान छोडनेका दिया सुझाव, ‘पैगम्बर’के चित्रपर हिंसाके पश्चात गृहयुद्ध जैसी स्थिति


१६ अप्रैल, २०२१
     फ्रांसने अपने नागरिकों और उद्योगोंको अस्थायी रूपसे पाकिस्तान छोडनेका सुझाव दिया है । पाकिस्तानमें गृहयुद्धकी स्थितिको देखते हुए फ्रांसीसी दूतावासने यह सुझाव दिया है । फ्रांस विरोधी ‘तहरीक-ए-लब्बैक’ पाकिस्तान ‘टीएलपी’के हिंसक प्रदर्शनोंके पश्चात पाकिस्तानके अनेक क्षेत्रोंमें हिंसात्मक गतिविधियां चल रही हैं । अपने नागरिकोंको भेजे ‘ईमेल’में दूतावासने लिखा है कि संकटको देखते हुए उन्हें और फ्रांसकी उद्योगोंको पाकिस्तान छोडनेका सुझाव दिया जाता है ।
          फ्रांसमें अक्तूबर २०२० में एक ४५ वर्षीय शिक्षककी गला रेतकर हत्या कर दी गई थी । इसके पश्चात फ्रांसके राष्ट्रपतिने अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताकी बात करते हुए पत्रिकाओंद्वारा ‘पैगम्बर’ मोहम्मदके चित्र बनाए जानेके अधिकारको भी समर्थन दिया था । तबसे ही पाकिस्तानमें फ्रांस विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं ।
     सोमवारको ‘टीएलपी’के नेता साद रिजवीको बन्दी बनाया गया था । रिजवीने ‘टीएलपी’की मांगोंको पूर्ण करनेके लिए २० अप्रैलका समय दिया था । रिजवीके बन्दी बनाये जानेके पश्चात पाकिस्तानमें हिंसक प्रदर्शन बढ गए, जिनमें २ पुलिसवालोंकी मृत्यु हो गई , और लगभग ३७० व्यक्ति चोटिल हो गए । पाकिस्तानके एक मन्त्री शेख राशिदका वक्तव्य आया था कि वे ‘पैगम्बर’के सम्मानकी रक्षाके पक्षमें हैं; किन्तु ‘टीएलपी’की मांगोंको स्वीकार करनेपर पाकिस्तानकी छवि एक कट्टरपन्थी राष्ट्रके रूपमें हो जाएगी ।
    पाकिस्तान पूर्वसे ही आतङ्कवादियों और क्रूर, आत्मघाती, हिंसात्मक समूहोंका समर्थन करता आया है । यहांतक कि उसने ओसामा बिन लादेनको भी शरण दी थी; अतः ऐसे राष्ट्रका विनाश ही एकमात्र उपाय है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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