श्रीराममन्दिर निर्माण कार्यका अपमान : धर्मान्धको बन्दी बनानेसे पूर्व प्रतिभूति नहीं दी गई 


०८ अप्रैल, २०२१
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीजीद्वारा श्रीराममन्दिर अयोध्याका भूमि पूजन करनेके उपरान्त ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इण्डिया’के एक कार्यकर्ता मोहम्मद नदीम नामक धर्मान्धने मन्दिरके विषयमें अपमानजनक वक्तव्य किया । उसके विरुद्ध प्राथमिकी प्रविष्ट की गई है, उसे शीघ्र बन्दी बनाया जाएगा । वह युवक त्वरित प्रतिभूति प्राप्त करने उच्च न्यायालयकी शरणमें पहुंचा । उच्च न्यायालयने उसका आवेदन अमान्य कर दिया । वह किसी भी समय बन्दी बनाया जा सकता है ।
मोहम्मद नदीमने भूमिपूजन कार्यक्रम सम्पन्न होनेके उपरान्त वक्तव्य दिया था कि बाबरी मस्जिदके स्थानपर राम मन्दिर निर्मित किया जा रहा है । बाबरी मस्जिदके स्थानकी सुरक्षा हेतु मुसलमान अग्रसर हों ।
अनिल कुमार तथा अमित कुमार जब बहरौली ग्राम पहुंचे तो गांववालोंने उन्हें बताया कि नदीम ऐसा दुष्प्रचार कर रहा है । सभी स्वधर्मियोंको बता रहा है कि बाबरी मस्जिदके स्थानपर मन्दिर निर्मित किया जा रहा है । अनिल व अमितने नदीमके विरुद्ध धार्मिक भावनाएं दुखानेके आरोपमें धारा १५३ ‘अ’के अन्तर्गत प्राथमिकी प्रविष्ट करवाई । नदीम भी त्वरित प्रतिभूति आवेदन लेकर उच्च न्यायालय पहुंचा; परन्तु २८ सितम्बर २०२०को न्यायालयने उसे प्रतिभूति देना अमान्य करनेके उपरान्त उसे किसी भी क्षण बन्दी बनाया जा सकता   है ।
   श्रीराममन्दिरको इतिहासमें अनेक आक्रमणकारियोंने नष्ट किया । तुलसीकृत साहित्यमें भी ऐसे आक्रमणका उल्लेख है । बाबरके किसी मन्त्रीने भी इसी क्रममें मन्दिर नष्टकर वहां मस्जिद जैसा ढांचा निर्मित किया था । सर्वोच्च न्यायालयके आदेशसे ही श्रीराममन्दिर निर्माण किया जा रहा है । अर्थात निर्माण न्यायोचित हो रहा है । ऐसे समयपर जनभावना तथा न्यायालयके निर्णयका सम्मान न कर उपद्रव भडकाने जैसे वक्तव्य देना धर्मान्धकी कट्टरपन्थी मानसिकताको दर्शाता है । वह कठोर दण्ड पानेके योग्य है और हिन्दुओंके लिए इसमें सीख यह है कि ये आज भी केवल शान्त दिखते हैं, वस्तुतः हैं नहीं अन्यथा ऐसी बात नहीं करते । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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