आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – १३)


गाजर (गुञ्जनम्, Carrot), प्रकृतिकी बहुत ही बहुमूल्य देन है, जो शक्तिका भण्डार है । गाजर फल भी है और शाक (सब्जी) भी तथा इसकी उपज पूरे भारतवर्षमें की जाती है । मूलीकी भांति गाजर भी भूमिके भीतर ही उत्पन्न होती है ।
घटक – गाजरमें ‘कार्बोहाइड्रेट’, शर्करा, ‘प्रोटीन’, ‘विटामिन-ए, बी-१, बी-२, बी-३, बी-६, सी’, ‘कैल्शियम’, लौहतत्त्व, ‘सोडियम’, ‘मैग्नीशियम’, ‘पोटैशियम’ आदि तत्व प्रचुर मात्रामें पाए जाते हैं ।
*नेत्रोंके लिए लाभदायक – नेत्रोंके लिए सबसे प्रथम गाजरका नाम आता है । गाजरमें विद्यमान ‘विटामिन-ए’ आपके नेत्रोंके लिए कई प्रकारसे लाभदायक होता है । गाजरके सेवनसे उन लोगोंको अत्यधिक लाभ होता है, जो दूरकी वस्तुएं नहीं देख पाते हैं । इसके अतिरिक्त, गाजरमें उपस्थित ‘बीटा कैरोटीन’ मोतियाबिन्दके विरुद्ध नेत्रोंकी रक्षा करता है ।
*रक्त शुद्ध करनेमें – निरन्तर गाजरका रस पीनेसे आपके शरीरका रक्त प्राकृतिक रूपसे स्वच्छ होता है । इस रसके स्वादको और भी अधिक बढानेके लिए इसमें मधु (शहद) डाल सकते हैं ।
*शुक्राणुओंकी संख्या – कई शोधोंके अनुसार यह सिद्ध हुआ है कि जो पुरूष कच्चे गाजर खाते हैं, उनके शुक्राणुओंकी संख्यामें अत्यधिक वृद्धि देखी जाती है; अतः शुक्राणुओंकी संख्या वृद्धिके लिए गाजर खाना अत्यधिक लाभप्रद है ।
*पाचनमें लाभप्रद – जिन लोगोंको पाचनकी समस्या होती है, वे गाजरका प्रयोग करके इसे समाप्त कर सकते हैं । इसमें पाए जानेवाले रेशे अर्थात ‘फाइबर’के कारण पाचन सशक्त होता है । इसके लिए दिनमें दो बार लाल रंगके गाजर खानेका प्रयास करें ।
*मधुमेह – मधुमेहसे ग्रस्त लोगोंको गाजरका शर्करा सरलतासे पच जाता है, जिससे गाजर खानेका एक और लाभ यह होता है कि इससे मधुमेहकी समस्यासे बचा जा सकता है । इससे शरीरमें ‘इन्सुलिन’की मात्राको बनाए रखनेमें सहायता मिलती है ।
*हृदयरोग – हृदयकी धडकन बढनेपर तथा रक्त गाढा होनेपर गाजरका सेवन करना लाभदायक होता है । गाजरका रस २०० मिलीलीटर मात्रामें प्रतिदिन पीनेसे हृदयकी निर्बलता नष्ट होती है, जिससे धडकनकी समस्याका निवारण होता है ।
*रक्तकी न्यूनता (एनीमिया) – एनीमिया पीडित रोगियोंको २०० मिलीलीटर गाजरके रसमें १०० मिलीलीटर पालकका रस मिलाकर पिलानेसे अधिक लाभ मिलता है अथवा इसमें पालकके स्थानपर चुकन्दरका ३० मिलीलीटर रस मिलाया जा सकता है ।
*सेवन विधि – गाजरको कच्चे सलादके रूपमें खाया जा सकता है । इसके अतिरिक्त गाजरका रस निकालकर पिया जा सकता है, गाजरकी तरकारी (सब्जी) बनाई जा सकती है और अचार बनाया जा सकता है ।
*सावधानियां :
१. जिन व्यक्तियोंको वायुविकार (गैस बननेकी समस्या) हो, उन्हें गाजरका रस या गाजरको उबालकर, उसका जल पीनेके लिए दें, इससे उन्हें लाभ मिलेगा ।
२. गाजर खानेके तुरन्त पश्चात कभी भी जल नहीं पीना चाहिए ।
३. शीतप्रकोप (जुकाम आदि), जीर्ण ज्वर, ‘न्यूमोनिया’में गाजरके रसका सेवन नहीं करना चाहिए । इसका कारण यह है कि रोग होनेके समय शरीरके भीतरके विषैले द्रव्य बाहर निकलते हैं । ऐसी अवस्थामें गाजरका रस इस प्रक्रियामें बाधा उत्पन्न करेगा ।



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