गणेश स्तुति


प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् |
भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुःकामार्थसिद्धये ||
अर्थ :- भक्तके हृदयमें वास करनेवाले गौरी पुत्र विनायकको वंदन करनेके पश्चात्, दीर्घायु, सुख-समृद्धि एवं सर्व इच्छा पूर्ति हेतु उनका अखण्ड स्मरण करना चाहिए !



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