गंगा दशहरा


 

प्रति वर्ष ज्येष्ठ माहकी शुक्ल पक्षकी दशमीको गंगा दशहरा मनाया जाता है, इस वर्ष गंगा दशहरा ४ जून २०१७ के दिन मनाया जाएगा ।
शास्त्र वचन है –gang dashara
दशमी शुक्लपक्षे तु ज्येष्ठमासे बुधेsहनि ।
अवतीर्णा यत: स्वर्गाद्धस्तर्क्षे च सरिद्वरा ।।
ज्येष्ठशुक्लदशम्यां तु भवेत्सौम्यदिनं यदि ।
ज्ञेया हस्तर्क्षसंयुक्ता सर्वपापहरा तिथि: ।।
ज्येष्ठस्य शुक्लादशमी सम्वत्सरमुखा स्मृता ।
तस्यां स्नानं प्रकुर्वीत दानं चैव विशेषत: ।।
गंगाजी देवनदी हैं, वे मनुष्यमात्रके कल्याणके लिए धरतीपर आईं, धरतीपर इनका अवतरण ज्येष्ठ शुक्लपक्षकी दशमीको हुआ; अत: यह तिथि उनके नामपर गंगादशहराके नामसे प्रसिद्ध हुई ।
अर्थात् इस तिथिको यदि बुधवार और हस्तनक्षत्र हो तो यह तिथि सब पापोंका हरण करनेवाली होती है ।
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी संवत्सरका मुख कही जाती है । इस दिन स्नान और दानका विशेष महत्त्व है ।
ब्रह्मपुराणका वचन है –
ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता ।
हरते दश पापानि तस्माद् दशहरा स्मृता ।।
अर्थात् इस तिथिको गंगास्नान एवं श्रीगंगाजीके पूजनसे दस प्रकारके पापोंका (तीन कायिक, चार वाचिक तथा तीन मानसिक) नाश होता है; इसलिए इसे दशहरा कहा गया है ।
इस दिन गंगाजीमें अथवा सामर्थ्य न हो तो समीपकी किसी पवित्र नदी या सरोवरके जलमें स्नान कर अभयमुद्रायुक्त मकरवाहिनी गंगाजी का ध्यान करें और नाममन्त्र – ‘गङ्गायै नम:’ से अथवा निम्न मन्त्रसे आवाहनादि षोडशोपचार पूजन करें –
‘ ॐ नम: शिवायै नारायण्यै दशहरायै गङ्गायै नम: ।’
उक्त मन्त्रमें ‘नम:’ के स्थानपर ‘ स्वाहा’ शब्द का प्रयोग करके हवन भी करना चाहिए । तत्पश्चात्
‘ॐ नमो भगवति ऐं ह्रीं श्रीं (वाक्-काम-मायामयि) हिलि हिलि मिलि मिलि गङ्गे मां पावय पावय स्वाहा’ – इस मन्त्रसे पांच पुष्पांजलि अर्पित करके गंगाके उत्पत्तिस्थान हिमालय एवं उन्हें पृथ्वीपर लानेवाले राजा भगीरथका नाममन्त्रसे पूजन करना चाहिए ।
पूजामें यथाशक्ति दस प्रकारके पुष्प, दशांग धूप, दस दीपक, दस प्रकारके नैवेद्य, दस ताम्बूल एवं दस फल होने चाहिए । दक्षिणा भी दस ब्राह्मणोंको देनी चाहिए; किन्तु उन्हें दानमें दिए जानेवाले जव (जौ) और तिल सोलह-सोलह मुठ्ठी होने चाहिए ।
भगवती गंगाजी सर्वपापहारिणी हैं; अत: दस प्रकारके पापोंकी निवृत्तिके लिए सभी वस्तुएं दसकी संख्यामें निवेदित की जाती हैं । इस दिन सत्तूका दान और गंगादशहरा स्तोत्रका पाठ किया जाता है, साथ ही गंगावतरण कथा भी सुनी जाती है ।



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