साधको, यदि आप कुछ समय व्यष्टि साधना व सेवा कर रहे हैं और आपके शरीरमें गांठें बन रही हैं या ‘सूजन’ बढ रही है तो समझ लें कि आपके शरीरमें अनिष्ट शक्तिद्वारा निर्मित काली शक्तिकी वृद्धि हो रही है । इस हेतु यह ध्यान दें कि आपकी निद्रा रात्रिमें ग्यारहसे तीनके मध्य अच्छेसे एवं नियमित हो रही है या नहीं ? क्योंकि रात्रिके इस कालमें जागनेसे शरीरके वे आतंरिक अंग जो शरीरसे विषाक्त तत्त्वोंके निष्कासनका कार्य करते हैं, वे नहीं कर पाते हैं और विषाक्त तत्त्वोंके एकत्रीकरणसे शरीरमें ‘सूजन’ बढती है । इसके साथ ही निम्नलिखित उपाय करें !
१. आकाश तत्त्वका आध्यात्मिक उपचार नियमित कमसे कम प्रतिदिन आधे घण्टेतक करें !
इस हेतु जब आकाश नीला हो एवं हलकी धूप हो तो उसके नीचे बैठें !
२. सम्पूर्ण दिवसमें कमसे कम ४८ मिनिट वायु मुद्राका अभ्यास करें !
३. यदि आप अपनी जीविकोपार्जन हेतु अधिक समय कम्प्यूटर, मोबाइल, टीवी इत्यादिके समक्ष समय बिताते हैं तो वहीं चारों ओर गत्तेके रिक्त बक्से लगाएं, इससे आकाश तत्त्वका उपाय होगा ।
४. यदि आप साधक हैं तो बाहरका भोजन करना टालें; क्योंकि वह भी अशुद्ध एवं अपवित्र होनेके कारण उसमें भी काली शक्ति होती है जो शरीरमें जाकर एकत्र हो जाती है ।
५. प्रतिदिन कुछ समय अर्थात कमसे कम आधा घण्टा योगासन एवं प्राणायाम करें !
शरीरमें गांठें होना या ‘सूजन’ होना यह अस्वस्थ शरीर एवं भविष्यमें गम्भीर रोगोंका सूचक होता है; इसलिए इसपर गम्भीरतासे सर्व उपाय करें !
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