राजस्थानमें दुग्धसे अधिक मूल्यपर विक्रय हो रहा गोमूत्र, क्या है कारण ?


जुलाई २४, २०१८

केवल दुग्ध ही नहीं, बल्कि गोमूत्र भी इन दिनों राजस्थानके किसानोंकी आयका बडा स्रोत बन गया है । राजस्थानमें गोमूत्रकी एकाएक इतनी मांग बढ गई है कि किसान संकरित गाय जैसे गिर और थरपार्करका गोमूत्र विपणिमें (बाजारमें) १५ से ३० रुपए प्रति लीटर तक विक्रय कर रहे हैं ! वहीं, गायके दुग्धका मूल्य २२ रुपये से लेकर २५ रुपये प्रति लीटर तक है । अब दुग्धसे महंगा गोमूत्र विक्रय हो रहा है । यही कारण है कि राज्यके किसान एकाएक धनी हो गए हैं । कई क्षेत्रोंमें किसानोंकी आयमें ३० प्रतिशतसे अधिक वृद्धि देखनेको मिली है ।

बताया जा रहा है कि राजस्थानमें गायकी गिर और थरपारकर जैसी कुछ प्रजातियोंके गोमूत्रकी मांग अधिक है । एक ओर जहां किसानोंको गायके दुग्धके लिए २२-२५ रुपये तक ही मिल पाते हैं, वहीं गोमूत्रके लिए प्रति लीटर १५-३० रुपयेका मूल्य सरलतासे मिल जाता है ।

‘टाइम्स ऑफ इण्डिया’के समाचारके अनुसार, जयपुरके रहने वाले किसान कैलाश गुर्जर बताते हैं कि गोमूत्रका प्रयोग जैविक कृषिके लिए होता है । इस क्षेत्रमें कार्य करने वाले सभी लोग उनसे गोमूत्र क्रय करते हैं और इसी कारण उनकी आयमें लगभग ३० प्रतिशतकी वृद्धि भी हुई है । कैलाशके अनुसार, गोमूत्रका प्रयोग रसायन युक्त उर्वरकके एक विकल्पके रूपमें होता है । इसके अतिरिक्त, औषधि और सभी धार्मिक कार्योमें भी इसका प्रयोग होता है । कैलाश कहते हैं कि गोमूत्रको एकत्रित करनेके लिए उन्हें सारी रात्रि जगना पडता है ।

राजस्थानके दुग्ध विक्रेता ओम प्रकाश मीणाके अनुसार, उन्होंने जयपुरमें गिर गायोंकी गौशालासे गोमूत्र क्रय करना आरम्भ किया है । मीणाका कहना है कि साधारण विपणिमें (बाजारमें) जैविक कृषि या अन्य कार्योंके लिए गोमूत्रको ३० से ५० रुपए प्रति लीटरके मूल्यमें विक्रय किया जा रहा है और इससे किसानोंकी आयमें अधिक वृद्धि भी हो रही है । मीणाका कहना है कि गोमूत्रसे जैविक कृषिके क्षेत्रमें बडा बदलाव भी देखनेको मिल रहा है । मीणाके अनुसार, बहुतसे लोग गोमूत्रको धार्मिक कार्योंमें प्रयोग करते हैं । यज्ञ और जनेऊ संस्कारमें इसका उपयोग सबसे अधिक है ।

राजस्थान शासनके अधीन आने वाली उदयपुरकी ‘महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रद्यौगिकी विश्वविद्यालय’ भी अपने प्राकृतिक कृषि परियोजनाके लिए प्रत्येक माह लगभग ३५० से ५०० लीटर गोमूत्र क्रय करती है । गोमूत्रके इस क्रयके लिए विश्वविद्यालयने राज्यकी कई गौशालाओंसे अनुबन्ध भी किया है । प्रत्येक माह लगभग १५०००-२०००० रुपयोंका गोमूत्र क्रय किया जाता है । विश्वविद्यालयके उप कुलाधिपति उमा शंकरके अनुसार, गोमूत्र किसानोंके लिए अतिरिक्त आयका एक साधन है ।

राज्य शासनमें गौपालन मन्त्रालयके मन्त्री ओता राम देवासीके अनुसार, राजस्थानमें २५६२ गौशालामें लगभग ८ लाख ५८ सहस्त्र ९६० गाय हैं । किसानोंकी आय वृद्धिके लिए राज्य शासन गायोंके संरक्षणके लिए कार्य कर रही है । इसके लिए राज्यकी २५६२ गौशालाओंमें साढे आठ लाखसे अधिक गायोंका संरक्षण भी किया जा रहा है ।

स्रोत : जी न्यूज



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