गौ माता सम्बन्धी कुछ महत्त्वपूर्ण बातें


१. गायको कभी भी भूलकर अपनी जूठन नहीं खिलानी चाहिए, गोमातामें देवताके तत्त्व होते हैं; इसलिए उन्हें जूठन खिलाकर कोई कैसे सुखी हो सकता है ?
२. जिनके मिट्टीके घर होते हैं, उन्होंने प्रतिदिन गायके पवित्र गोबरसे रसोई और पूजाके स्थानको लीपना चाहिए, इससे घरमें सात्त्विकता निर्माण होती है और घरमें अनिष्ट शक्तियां वास नहीं कर पाती हैं ।
३. गायके दूध, घी, दही, गोबर, और गौमूत्र, इन पांचोंकेद्वारा (जिन्हें ‘पञ्चगव्य’ कहते हैं) मनुष्योंके पाप दूर होते हैं ।
४. गायके गोबरमें (जिसमें लक्ष्मीजीका वास होता है) और गौमूत्रमें अनिष्ट शक्तियोंको दूर करनेकी क्षमता होती है, साथ ही, गौमूत्रसे रोगाणु नष्ट होते हैं ।
५. नित्य प्रति गौकी पूजा, आरती और परिक्रमा करनी चाहिये, यदि नित्य न हो सके तो गोपाष्टमीके दिन अवश्य ही श्रद्धासे पूजा करनी चाहिए ।
६. गाय यदि किसी गड्ढेमें गिर गई हो या दलदलमें फंस गई हो, तो सबसे पहले गौमाताको बचाना चाहिए ।
७. जो गायके बछडोंको, बैलोंको हलोंमें जोतकर, उन्हें निर्ममतासे मारते हैं, कीलें चुभाते हैं, गाडीमें जोतकर बोझा लादते हैं, उन्हें घोर नर्ककी प्राप्ति होती है ।
७. जो जल पीती और घास खाती गायको हटाते हैं, वो पापके भागी बनते हैं ।
८. यदि तीर्थयात्राकी इच्छा हो; परन्तु शरीरमें बल या पासमें धन न हो, तो गौ माताके दर्शन, उनकी पूजा व सेवा और परिक्रमा करनेसे सारे तीर्थोंका फल मिल जाता है, गाय सर्वतीर्थमयी है ।
९. जो लोग गौ-रक्षाके नामपर या गौशालाओंके नामपर पैसा इकट्ठा करते हैं और उन पैसोंसे गौ-रक्षा न करके स्वयं ही खा जाते हैं, उनसे बढकर पापी और दूसरा कौन होगा ? गौमाताके निमित्त आये हुए पैसोमेंसे एक पाई भी कभी भूलकर अपने स्वार्थ हेतु नहीं लगानी चाहिए, जो ऐसा करता है, वह निश्चित ही नरकगामी होता है ।



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