मार्च १८, २०१९
गौतम गम्भीरने कहा कि पाकिस्तानके साथ खेलना है या नहीं ये तो ‘बीसीसीआई’ ही निर्धारित करे; परन्तु मैं निजी रूपसे यह कह सकता हूं कि हमारे सैनिक अधिक आवश्यक है और सैनिकोंके सामने २ अंकोंका कोई मूल्य नहीं है ।
गम्भीरने कहा कि देश सबसे प्रथम आता है, न कि क्रिकेटका खेल या कुछ और साथ ही सैनिकोंके सामने किसी क्रिकेटके खेलका कोई मूल्य नहीं है !
“किसी भी राष्ट्रका स्वाभिमान उसका प्राण है, यदि स्वाभिमानता नहीं है तो वह दास ही समझने योग्य है । कोई शत्रु राष्ट्र आपके वीर सैनिकोंका मार रहा है और आप उसके साथ खेलनेको सज्ज हो; क्योंकि आपको एक तथाकथित पुरस्कार चाहिए तो इससे लज्जाजनक और क्या होगा ? इससे ज्ञात होता है कि आपमें न राष्ट्रप्रेम है और न ही स्वाभिमान ! सैनिकोंके शौर्यको पैरों तले रौंदकर दो अंक मांगनेवाले व्यक्ति राष्ट्रमें रहने योग्य भी नहीं हो सकते हैं ! खेल राष्ट्रसे है, राष्ट्र खेलसे नहीं, यह स्मरण रखें और जिस खेलके लिए हम दो अंकोंकी मांग कर रहे हैं, वह तो खेल कहलाने योग्य ही नहीं है; क्योंकि जिस वस्तुसे राष्ट्रकी युवा शक्तिका विकास न होकर ह्रास हो, उसका बन्द होना ही राष्ट्रके लिए कल्याणकारी है ! किसी क्षेत्रमें कार्य करनेके पश्चात उसके विरुद्घ कुछ बोलकर सत्यका पक्ष लेना कठिन होता है; परन्तु राष्ट्रप्रेमी इस खिलाडीने इस प्रखर वक्तव्यसे यह सिद्ध किया है कि वह राष्ट्रहितकी भावनासे ओत-प्रोत हैं, जो अवश्य ही अभिनन्दनीय है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : डीबीएन
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