घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ९)


नित्य पूजा करना
स्नान एवं वास्तु-शुद्धिके पश्चात नित्य पूजा अवश्य करें । चाहे आप किसी भी योगमार्गसे साधना कर रहे हों, किन्तु जिस ईश्वरने इस ब्रह्माण्डका सृजन कर, उसे सुचारू रूपसे चलाने हेतु देवताओंको कार्यभार सौंपा है, उनके प्रति अपनी दिनचर्याके मध्य कृतज्ञता व्यक्त करना न भूलें । पञ्चोपचारसे अपने पूजाघरमें नित्य पूजन कर, देवताओंके प्रति अपनी कृतज्ञता अवश्य व्यक्त करें । इस हेतु देवताके छायाचित्र या मूर्तिको स्वच्छ कर, उन्हें धूप, दीप गन्ध, पुष्प एवं नैवेद्य दिखाकर आरती गाएं । आरती एक, तीन या पांच देवताओंकी, समय एवं अपने आध्यात्मिक स्तर अनुरूप गा सकते हैं । उस आरतीमें घरके सभी सदस्य सम्मिलित हों, यह ध्यान दें । भावपूर्वक की गई आरतीसे देवताओंका हमारे घरपर सूक्ष्म आगमन होता है एवं हमारे वास्तुकी शुद्धि होती है । आरतीसे उपस्थित सदस्योंके ऊपर सम्पूर्ण दिवस कवच निर्माण रहता है एवं व्यावहारिक व अध्यात्मिक कष्ट न्यून होकर, मन प्रसन्न एवं आनन्दी रहता है । (क्रमश:)



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