घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – १२)


पूजाघरको सात्विक रखने हेतु  निम्लिखित बातोंका ध्यान रखें –
१. कुछ भक्तोंके घर अनेक पुराने एवं फटे हुए देवताओंके चित्र पूजाघरमें लगे रहते हैं, कुछ मूर्तियां भी पुरानी और खण्डित होती है, जब उनसे पूछती हूं कि इतने पुराने फटे हुए चित्र और खण्डित मूर्ति पूजा घरमें क्यों रखी है ?, तो वे कहते हैं कि वे उनके किसी प्रिय एवं निकट सम्बन्धीके है, जो अब इस संसारमें नहीं है या उन्होंने उन्हें भेंटमें दी थी और उसे उन्होंने उनकी स्मृति चिन्ह समझ रखा है । चित्र यदि जीर्ण-शीर्ण हो जाए और मूर्ति खण्डित हो तो उससे देवताके चैतन्यके प्रक्षेपणका प्रमाण नगण्य हो जाता है; अतः उन्हें स्वच्छ एवं बहते जलमें त्वरित प्रवाहित करें और नूतन चित्र या मूर्ति लाकर पूजाघरमें रखें (मूर्ति विज्ञान अनुसार सन्तोंके मार्गदर्शनमें बने हुए सात्विक चित्र पाने हेतु भी हमसे या सनातन संस्थासे सम्पर्क कर सकते हैं ।) पूजाघरमें फटे-पुराने देवताओंके चित्र या खण्डित मूर्ति रखनेसे पूजाघरकी सात्त्विकता नष्ट हो जाती है और पूजा करते समय देवताके तत्त्व आकृष्ट नहीं होते हैं ।

२. पूजाघरमें रंग करते समय मात्र उसे श्वेत या हल्का पीला, ये दो रंगमें ही रंग रोगन करें । श्वेत रंग निर्गुण तत्त्वको भी आकृष्ट करता है और पूजा करते समय मन एकाग्र होनेमें श्वेत रंगकी भीत (दीवार) सहायक सिद्ध होती है । प्रयास करें कि प्रत्येक दीपावली चाहे आप सम्पूर्ण घरमें रंगसे पुताई करवाएं या नहीं; किन्तु पूजाघरकी पुताई अवश्य कराएं । इससे वर्षभरका सूक्ष्म काला आवरण नष्ट हो जाता है और पूजाघरके सात्त्विकतामें वृद्धि होती है । भूलसे पूजाघरका रंग हरा, नीला, लाल, गुलाबी, नारंगी न रखें ! (क्रमश:)



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