घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – १३)


पूजाघरको सात्विक रखने हेतु निम्लिखित बातोंका ध्यान रखें –
अ. अनेक व्यक्ति प्लास्टिकके फूल, पत्ते और रोलेक्सके बने वन्थनवारसे पूजाघरको सजाते हैं तो कुछ पूजाघरमें छोटे आकारके बिजलीके रंग-बिरंगे छोटे बल्ब (ट्यूनी बल्ब) जलाकर उसकी सजावट करते हैं । यह सब तमोगुणी होनेके कारण पूजाघर की सात्त्विकताको न्यून कर देता है और आपके मनको एकाग्र नहीं होने देता है; अतः प्रतिदिनकी पूजा करते समय घरमें ताजे फूल, रंगोली, तुलसीदलसे एवं उत्सवोंके समय गेंदेके पुष्प व आम्रपल्लवके बन्दनवार (तोरण) व केलेके स्तम्भ जैसे नैसर्गिक वस्तुओंसे सजावट करें एवं घी या तिलके तेलका दीप जलाएं ।
   भूलसे भी पूजाघर या मन्दिरमें मोमबत्ती न जलाएं ! आज कल अनेक आधुनिक स्त्रियां मॉलसे मोमबत्ती लाकर पूजाघरमें जलाती हैं, देसी गायके घीसे स्वर्गलोक तकके देवताके तत्त्व, आपके पूजाघरमें आकृष्ट होते हैं और मोमबत्तीसे पातालके असुरी शक्तियोंकी लहरियां आकृष्ट होती हैं ! अब यह न पूछें कि इसाई तो ऐसे करते हैं, मैंने आपको पूर्वमें ही बताया है कि अहिन्दू पन्थोंका अध्यात्म सतही है, इसाई तो चप्पल पहकर और गौ मांस खाकर गिरिजाघरमें जाते हैं; अतः उनके कृत्य अनुकरणके योग्य नहीं होते !
आ.  कुछ भक्त अपने घरके सभी कक्षोंमें देवी-देवताके अनेक चित्र लगा कर रखते हैं । चित्रका सभी कक्षोंमें लगाना तब तक ठीक है, जब तक आप उस सभी चित्रोंका पंचोपचार पूजन करते हैं और अधिकांशत: मैंने पाया है, लोग ऐसे करते नहीं है । देवी-देवता कोई सजावटकी वस्तु नहीं हैं, वे पूज्य एवं हमारे आराध्य होते हैं; अतः जहां भी उनका स्वरूप हो उसे प्रतिदिन स्वच्छ सूखे कपडेसे पोछें और कमसे कम धूप अवश्य दिखाएं । ऐसा इसलिए करना चाहिए, क्योंकि देवताके रूपके साथ शब्द, रस, गन्ध स्पर्श और शक्ति सहवर्ती होती हैं, ऐसा न करना एक प्रकारसे उनकी अवमानना करना है; अतः यदि आपसे देवताकी पूजा सर्वत्र नहीं हो पाती है तो प्रयास करें कि मात्र देवघरमें देवताओंकी प्रतिमा या चित्र रखें ।



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