घरका वैद्य : आम (भाग-१)


परिचय : आम भारत वर्ष एवं पूर्वी द्वीप समूहका आदिवासी पौधा है । यह ग्रीष्म प्रधान देशका वृक्ष है, शीतप्रधान देशमें यह उत्पन्न नहीं होता है । हिमालयपर भूटानसे कुमायुंतक इसके वनीय वृक्ष पाए जाते हैं । सम्पूर्ण भारतवर्षमें इसके वृक्ष लगाए जाते हैं और फलते-फूलते हैं । आमके अनेक वर्ग पाए जाते हैं । जो आम खेतोंमें गुठली बोकर उत्पन्न किए जाते हैं, उन्हें देशी या बीज आम कहते हैं और जो आम ऊंची जातिके आमोंसे ‘कलम’ बांधकर उगाए जाते हैं, वे ‘कलमी’ आम कहलाते हैं । इनके अतिरिक्त देश, स्थान, आकार, रंग और रूपके भेदसे इनकी अनेक जातियां पाई जाती हैं । देशी आममें तन्तु (‘रेशा’) होनेसे इसका रस पतला होता है, जिसे चूसकर खानेके लिए लिया जा सकता है; किन्तु ‘कलमी’ आममें रेशा नहीं होनेसे, वे प्रायः काटकर खाए जाते हैं । औषधिके प्रयोगमें ‘कलमी’की अपेक्षा दोहन करनेवाले (चूसनेवाले) आम अधिक गुणकारी होते हैं ।

* बाह्यस्वरूप : इसके वृक्ष ३० से १२० ‘फुट’तक ऊंचे होते हैं । पत्र ४ से १२ ‘इंच’ लम्बे, ३ ‘इंच’तक चौडे, भालाकार, आयताकार, तीक्ष्णाग्र होते हैं, जिनके मसलनेपर सुगन्ध आती है । पुष्प छोटे हरित, पीत, लम्बी मञ्जरीमें आते है, जिससे मादक सुगन्ध आती है । फल अनेक आकृतिके,कच्चे होनेपर हरे तथा पकनेपर पीताभ या रक्‍ताभ हो जाते हैं । फलके भीतर बडी गुठली (बीज) तथा उसके भीतर बीजमज्जा होती है । वसन्‍तमें पुष्प तथा ग्रीष्म ऋतुमें फल लगते हैं ।

* संस्कृतमें – आम्र, फल, श्रेष्ठ, कामसर, पिकमवल्लभ, रसाल, हिन्दीमें – आम, गुजरातीमें – आंबो, अमरी, मराठीमें – आबा, बंगालीमें – आम्र, तेलगुमें – माविडी, पंजाबीमें – अम्ब ।

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