घरका वैद्य – बथुआ (भाग-५)


आंखोंके स्वास्थ्यके लिए बथुएका साग : आजकल बच्चे तकनीकी उपकरणोंसे इतने जुड चुके हैं कि वे अपनी छोटीसी आयुमें ही आंखोंकी कार्य क्षमताको खो देते हैं । बथुएमें जस्ता और लौह सामग्री अच्छी मात्रामें होती है, जो हमारी दृष्टिको उत्तम बनाए रखनेमें सहायता करती है ।

मुखकी समस्या दूर करे : मुखकी दुर्गन्ध एक बहुत ही विकृत समस्या है । विशेष रूपसे यह उस समय लज्जाका कारण बनती है, जब किसीको इस समस्याके साथ किसीसे वार्तालापका करना पडता है । दुर्गन्धयुक्त सांस न केवल आपको दूसरोंके सामने लज्जाका आभास कराती है; अपितु आपकी अच्छी छविको भी विकृत करती है । बथुएकी पत्तियोंका सेवन करनेसे सांस, मसूडोंसे रक्त स्त्राव (Gum bleeding), दांतोंकी सडन और मुखसे सम्बन्धित अन्य समस्याएं न्यून हो सकती हैं । बथुआ पूरे मुखके स्वास्थ्यके लिए भी लाभकारी होता है ।

अर्शका (बवासीर) उपचार : पाचन तन्त्रको स्वस्थ्य रखने और मल त्यागको (Bowel Movements) सरल बनानेमें बथुआ सहायता करता है । इस कारण यह उन लोगोंके लिए भी लाभदायक होता है जिन्हें अर्शकी समस्या होती है । अर्श (बवासीर) एक बहुत ही पीडादायक रोग है, जो गुदा निर्वहनके पारित होनेमें जलन और तीखेपनका कारण बनता है । इस घृणित और पीडादायक रोगसे छुटकारा पानेके लिए दैनिक आधारपर बथुएका सेवन दिनमें दो बार करें ! यह ‘बवासीर’की (Piles) समस्याको दूर करनेमें सहायता करता है ।

बथुआ सागसे यकृतकी रक्षा करें : जब हम औषधि लेते हैं, तो कभी-कभी चिकित्सा, प्रभावके पश्चात भी वह अपना दुष्परिणाम (अवशेष) छोड देती है । अवशेष यकृतद्वारा अवशोषित किया जाता है और धीरे-धीरे शरीरमें फैलाया जाता है । एक अध्ययनसे पता चलता है कि बथुएकी पत्तियां, कुछ औषधियोंके अवशेषोंके लिए एक अच्छा प्रतिरक्षात्मक होती हैं । बथुएके सेवन करनेसे सभी प्रकारके विषाक्त पदार्थोंसे छुटकारा पाया जा सकता है ।



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