गुडके उपयोग मस्तिष्कके लिए : गुडका हलवा खानेसे मस्तिष्क तीक्ष्ण होता है और शरीरसे विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं । गुडका हलवा, शीतकालमें शरीरके तापमानको नियन्त्रित रखता है । इसे खानेसे स्मरण शक्ति क्षीण नहीं होती है । इसलिए यदि आप अपनी स्मरण शक्तिको अच्छा रखना चाहते हैं तो इसका नियमित सेवन कीजिए ।
गुड खानेके लाभ ‘जुकाम’ और पुरानी खांसीके लिए : साधारण ‘सर्दी-खांसी’में गुड बहुत ही लाभदायक होता है । आप गुडको अदरक और काली मिर्च मिलाकर भी खा सकते हैं । यह ‘सर्दी-खांसी’में औषधिके रूपमें कार्य करता है । ३ ग्राम गुडमें २०० मिलीग्राम काली मिर्च, ५०० मिलीग्राम सूखा अदरकका चूर्ण (पाउडर), १ चम्मच मधु मिलाकर, भोजनके पश्चात, एक दिनमें तीन बार इसका सेवन करें ! यह प्रथम बारमें ही अपना प्रभाव दिखाना आरम्भ कर देता है । गुड पुरानीसे पुरानी खांसीमें भी लाभदायक है । गुडके उपयोगसे गला स्निग्ध (चिकना) और लचीला बनता है । आयुर्वेदके अनुसार गुड, फेफडोंमें उष्णता उत्पन्न करता है और श्वसन तन्त्रतक फैल जाता है । गुड खांसी, श्वासरोग (दमा) और सांस लेने जैसे कष्टोंमें सहायता करता है । यदि किसीको भी सांस लेनेका कष्ट हो तो वह शर्कराके सेवनके स्थानपर गुडका सेवन करे !
गुडसे श्वासरोगमें लाभ : श्वासरोगसे बचनेके लिए भी गुडका सेवन करना बहुत लाभप्रद होता है । गुडमें ऐसे गुण होते हैं, जो शरीरके तापमानको नियन्त्रित करते हैं । इसमें ‘एंटी-एलर्जिक’ विशेषताएं उपस्थित होती हैं । इसमें ‘आयरन’ भी होता है, जो रक्त परिसंचरण और श्वसन प्रणालीमें सुधार करता है । जिन लोगोंको ‘दमा’ होता है, उनके शरीरमें रोग-प्रतिरोधक शक्ति अल्प होती है । गुडका सेवन आपकी रोग-प्रतिरोधक शक्तिको बढाता है । यदि कोई बहुत लम्बे समयसे श्वासरोगसे पीडित है; तब भी गुडका सेवन बहुत लाभदायक होता है ।
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